थैलेसीमिया से पीड़ित 7 बच्चे बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए वेल्लोर रवाना, मंगल पांडेय का ऐलान - पीड़ित बच्चों का निःशुल्क ट्रांसप्लांट करवा रही बिहार सरकार
थैलेसीमिया (मेजर) पीड़ित 07 बच्चों का एक नया बैच 13 जनवरी को बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) हेतु तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) रवाना किया गया है।
बिहार सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़, संवेदनशील और सर्वसुलभ बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और मार्गदर्शन में गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों के इलाज को सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में थैलेसीमिया (मेजर) से पीड़ित सात बच्चों का एक नया बैच 13 जनवरी को बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के लिए तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) रवाना किया गया। यह थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का सातवां बैच है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस बैच में राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित बच्चों को शामिल किया गया है। इनमें मधुबनी, मुजफ्फरपुर, मधेपुरा, वैशाली, सीतामढ़ी, खगड़िया और पूर्वी चंपारण से एक-एक बच्चा शामिल है। उन्होंने बताया कि इससे पहले अलग-अलग चरणों में कुल 26 बच्चों का सफलतापूर्वक बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया जा चुका है।
मंगल पाण्डेय ने कहा कि राज्य सरकार थैलेसीमिया, हीमोफिलिया और सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के समुचित इलाज और सतत देखभाल के लिए बहुस्तरीय प्रयास कर रही है। इसके तहत राज्य में छह एकीकृत डे-केयर केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां जांच, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, आयरन चेलेटिंग दवाएं और एंटी हेमोफिलिक फैक्टर ट्रांसफ्यूजन सहित आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना के अंतर्गत 12 वर्ष से कम आयु के योग्य बच्चों के लिए सीएमसी वेल्लोर के साथ समझौता ज्ञापन किया गया है। इस योजना के तहत भाई या बहन से एचएलए मैच होने पर चयनित बच्चों का निःशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया जाता है। राज्य सरकार प्रति मरीज लगभग 15 लाख रुपये खर्च करती है, जिसमें इलाज से जुड़ी सभी आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं। सरकार ने गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।