Bihar Politics : 7 सर्कुलर रोड ! नीतीश का 'वेटिंग रूम' या सत्ता वापसी का लॉन्चपैड? बीजेपी के लिए बरकरार रहेगा मांझी वाला खतरा!
Bihar Politics : नीतीश कुमार की 7 सर्कुलर रोड से वापसी भी होती है. इसके पहले भी इसी बंगले से उन्होंने जीतनराम मांझी को सीएम पद से हटाया था.......पढ़िए आगे
PATNA : बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के बीच नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। सत्ता की कमान अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथों में जाने की तैयारी है, लेकिन इस बीच नीतीश कुमार के नए ठिकाने ने सियासी गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। नीतीश अब राजभवन के पास स्थित '1 अणे मार्ग' छोड़कर 7 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में शिफ्ट हो रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहाँ आने के बाद वे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के पड़ोसी बन जाएंगे, जिससे इस हाई-प्रोफाइल इलाके की राजनीतिक हलचल बढ़ने की उम्मीद है।
7 सर्कुलर रोड का यह बंगला नीतीश कुमार के लिए केवल एक आवास नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक संघर्ष और वापसी का प्रतीक रहा है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद जब उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा था, तब भी वे इसी बंगले में आए थे। इसी पते पर रहते हुए उन्होंने जीतन राम मांझी से सत्ता वापस लेने की रणनीति तैयार की थी और 2015 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल कर दोबारा मुख्यमंत्री बने थे। समर्थकों के बीच यह बंगला नीतीश के लिए 'लकी' माना जाता है।
यह बंगला अपनी मजबूती और सुंदरता के लिए भी मशहूर है। नीतीश कुमार ने खुद अपनी देखरेख में इसका निर्माण करवाया था, जो पूरी तरह से भूकंप रोधी है। इसकी साज-सज्जा का विशेष ध्यान रखा गया है और इसके विशाल लॉन में बिछी हरियाली के लिए खास तौर पर कोलकाता से घास मंगवाई गई थी। मुख्यमंत्री रहते हुए भी नीतीश इसका उपयोग कार्यालय के रूप में करते रहे हैं, हालांकि विपक्षी आरोपों के बाद इसे तकनीकी रूप से मुख्य सचिव के नाम पर आवंटित किया गया था।
इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए नई सरकार के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा कि अब नई सरकार बिहार के विकास कार्यों को आगे बढ़ाएगी और उनके स्तर से शासन को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि बिहार आने वाले समय में प्रगति की नई ऊंचाइयों को छुएगा। उनके इस बयान को एक संरक्षक और मार्गदर्शक की भूमिका में आने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों के मन में अब भी एक बड़ा सवाल तैर रहा है। क्या भाजपा के नेतृत्व वाली नई सरकार में नीतीश कुमार का 'मार्गदर्शन' उसी तरह प्रभावी रहेगा जैसा उन्होंने सोचा है? चर्चा इस बात की भी है कि यदि जीतन राम मांझी के कार्यकाल की तरह भविष्य में कोई वैचारिक मतभेद उभरा, तो क्या नीतीश कुमार एक बार फिर इसी 7 सर्कुलर रोड से सत्ता वापसी का कोई नया खेल रचेंगे? फिलहाल, बिहार की जनता और विपक्षी दल नीतीश के हर कदम पर नजरें गड़ाए हुए हैं।