Bihar Politics: बांकीपुर में झटका के बाद अब RJD में तेजस्वी का ऑपरेशन कायाकल्प, इन 20 जिलाध्यक्षों की छुट्टी तय!

Bihar Politics:पटना के बांकीपुर में चुनावी झटके के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल यानी राजद में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी है। पा...

तेजस्वी का ऑपरेशन कायाकल्प- फोटो : social Media

Bihar Politics:पटना के बांकीपुर में चुनावी झटके के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल यानी राजद में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी है। पार्टी नेतृत्व ने सभी प्रकोष्ठों के साथ-साथ जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की कमेटियों को भंग कर दिया है। अब संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद शुरू हो गई है।पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी कवायद की कमान तेजस्वी यादव के हाथ में रहेगी और नए संगठन में युवा चेहरों को खास तवज्जो दी जाएगी। माना जा रहा है कि पुराने संगठन के करीब 20 जिला अध्यक्षों को दोबारा मौका नहीं मिलेगा।

बिहार में भले ही कुल 38 जिले हैं, लेकिन राजद के जिला अध्यक्षों की संख्या करीब 43 रही है। इसकी वजह कुछ जिलों में एक से अधिक जिला अध्यक्ष का होना है।कमेटियां भंग होने के बाद फिलहाल राजद में कोई जिला अध्यक्ष नहीं है। पार्टी सूत्रों के अनुसार नए सिरे से संगठन तैयार करते समय करीब 20 पूर्व जिला अध्यक्षों की जगह नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।इनमें लगभग 15 नेताओं के उम्रदराज होने के कारण बाहर होने की संभावना है, जबकि विवादों में रहे करीब 5-6 नेताओं को भी दोबारा जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद कम बताई जा रही है।

तेजस्वी यादव के संगठनात्मक प्लान में युवा नेतृत्व को सबसे ज्यादा अहमियत मिलने की बात कही जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक 60 साल या उससे अधिक उम्र के नेताओं को जिला अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों पर दोबारा जिम्मेदारी मिलने की संभावना कम है।लखीसराय के कालीचरण दास इसका उदाहरण हैं, जिन्होंने अधिक उम्र के कारण पहले ही इस्तीफा दे दिया था।हालांकि पार्टी का फोकस सिर्फ उम्र कम रखने पर नहीं होगा। परिपक्व, सक्रिय और संगठन के प्रति समर्पित युवाओं को जिम्मेदारी देने पर जोर रहेगा।

नए जिला अध्यक्षों के चयन में दूसरा अहम पैमाना छवि होगी। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक ऐसे नेताओं को संगठन की कमान देने से बचा जाएगा जिनका नाम लगातार विवादों में रहा है या जिनकी इलाके में छवि कमजोर है।राजद ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है जो संगठन के प्रति समर्पित हों, क्षेत्र में सक्रिय हों और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बना सकें।

राजद के नए संगठन में सबसे दिलचस्प पहलू सामाजिक समीकरण को लेकर होगा। पार्टी अपने पारंपरिक कोर वोट बैंक यानी यादव-मुस्लिम आधार को बनाए रखने के साथ-साथ दूसरे सामाजिक वर्गों को भी संगठन में ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की कोशिश करेगी।भंग होने से पहले राजद के 43 जिला अध्यक्षों में 16 यादव और 7 मुस्लिम थे।वहीं गैर-यादव OBC-EBC से 9, SC से 6, सवर्ण वर्ग से 2, वैश्य समाज से 1 और ST समाज से 1 नेता जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।अब नए संगठन में इन सभी सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी।

तेजस्वी यादव की रणनीति में ‘A टू Z’ फॉर्मूला अहम माना जा रहा है। इसका मकसद पार्टी को सिर्फ एक खास सामाजिक आधार तक सीमित रखने के बजाय सभी जाति, वर्ग और धर्म के लोगों तक संगठन का विस्तार करना है।नए जिलाध्यक्षों के चयन में स्थानीय सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यानी किसी जिले में किस सामाजिक समूह को प्रतिनिधित्व देने से संगठन मजबूत होगा, इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाएगा।पार्टी सूत्रों के मुताबिक नए जिला अध्यक्षों के चयन में मुख्य रूप से तीन बातों पर फोकस रहेगा उम्र 60 साल से कम हो।विवादित चेहरा न हो और इलाके में अच्छी छवि हो।सक्रिय और परिपक्व युवा कार्यकर्ता को मौका मिले।इसके साथ ही संगठन के प्रति निष्ठा और समर्पण को भी अहम माना जाएगा।

राजद नेतृत्व संगठन में नई ऊर्जा भरने और जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। जिला से लेकर पंचायत स्तर तक नए चेहरों को लाने से पार्टी कार्यकर्ताओं में नई सक्रियता पैदा करने की रणनीति है।तेजस्वी की कोशिश संगठन को ज्यादा युवा, सक्रिय और सामाजिक रूप से व्यापक बनाने की बताई जा रही है। जिला अध्यक्षों के साथ-साथ प्रखंड और पंचायत स्तर पर भी नए समीकरण तैयार किए जाएंगे।कुल मिलाकर राजद में यह सिर्फ कमेटियां भंग करने की कवायद नहीं, बल्कि संगठन की पूरी तस्वीर बदलने की तैयारी मानी जा रही है। अब नजर इस बात पर है कि तेजस्वी यादव किन नए चेहरों पर भरोसा जताते हैं और उनका ‘A टू Z’ सामाजिक समीकरण बिहार की सियासत में कितना असरदार साबित होता है।