Bihar Politics: मुझे हटाया और कांग्रेस सिमट गई...अखिलेश प्रसाद सिंह का बड़ा हमला, बिहार नेतृत्व और रणनीति पर उठाए सवाल

Bihar Politics: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने पार्टी की चुनावी रणनीति, संगठनात्मक फैसलों और बिहार नेतृत्व पर खुलकर निशाना साधते हुए हार के लिए गलत राजनीतिक सोच और प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।...

खिलेश प्रसाद सिंह का बड़ा हमला- फोटो : reporter

Bihar Politics:बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने पार्टी की चुनावी रणनीति, संगठनात्मक फैसलों और बिहार नेतृत्व पर खुलकर निशाना साधते हुए हार के लिए गलत राजनीतिक सोच और प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। उनके बयान ने कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है।

दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि जब वह बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष थे, तब पार्टी की स्थिति अलग थी, लेकिन उनके पद से हटने के बाद संगठन कमजोर हुआ और चुनावी नतीजे भी निराशाजनक रहे। उन्होंने कहा सबसे पहले मुझे अध्यक्ष पद से हटाया गया। उसके बाद जो बिहार चुनाव का परिणाम आया, वह पूरे देश ने देखा। अगर मैं अध्यक्ष रहता तो कांग्रेस केवल पांच-छह सीटों तक सीमित नहीं रहती।

उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और संगठन में हुए बदलावों पर भी नाराजगी जाहिर की। साथ ही उन्होंने पूर्व एआईसीसी सचिव शाहनवाज आलम का जिक्र करते हुए कहा कि नेतृत्व परिवर्तन के बाद पार्टी की दिशा बदल गई और उसके नतीजे भी सामने आ गए।

अखिलेश प्रसाद सिंह ने कांग्रेस की सामाजिक न्याय आधारित राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का नारा कोई नया नहीं है। यह विचारधारा पहले से ही बिहार की राजनीति में मौजूद रही है। उन्होंने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर और जगदेव प्रसाद के दौर से यह विचार सुनने को मिलता रहा है। बाद में लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव और कुछ हद तक नीतीश कुमार भी इसी सामाजिक समीकरण की राजनीति करते रहे।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इसी मुद्दे को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और व्यापक जनसमर्थन जुटाने के बजाय सीमित राजनीतिक विमर्श में उलझ गई। उनके मुताबिक, पार्टी को सामाजिक न्याय के साथ-साथ विकास, रोजगार, शिक्षा और आम जनता के मुद्दों पर भी बराबर ध्यान देना चाहिए था।

अखिलेश प्रसाद सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। उनके तीखे तेवरों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि कांग्रेस के भीतर रणनीति और नेतृत्व को लेकर असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इन टिप्पणियों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और आगामी चुनावों से पहले संगठनात्मक एकजुटता कैसे कायम रखता है।

दिल्ली से धीरज कुमार सिंह की रिपोर्ट