Bihar Amin:अमीन बनेंगे सहायक राजस्व अधिकारी! बिहार के अमीनों को बड़ी राहत, ट्रांसफर से लेकर परमानेंट नौकरी तक सरकार का बड़ा फैसला, बस करना होगा एक काम

Bihar Amin: बिहार में लंबे अरसे से अपने हक और सहूलियतों की मांग कर रहे अमीनों के लिए अब राहत भरी खबर सामने आई है।...

अमीन बनेंगे सहायक राजस्व अधिकारी!- फोटो : social Media

Bihar Amin: बिहार में लंबे अरसे से अपने हक और सहूलियतों की मांग कर रहे अमीनों के लिए अब राहत भरी खबर सामने आई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अमीन प्रतिनिधियों के साथ हुई अहम वार्ता के बाद कई बड़े फैसलों पर सहमति जताई है। इन फैसलों को सरकारी अमले में बड़ा बदलाव और कर्मचारियों को साधने की सियासी कवायद के तौर पर भी देखा जा रहा है।

सबसे बड़ा फैसला अमीनों के तबादले को लेकर लिया गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि अब अमीनों का ट्रांसफर उनके गृह जिले से सटे तीन जिलों के भीतर किया जा सकेगा। इसके लिए जल्द ही एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जहां अमीन अपनी पसंद और विकल्प दर्ज कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे वर्षों से मनचाही पोस्टिंग की मांग कर रहे हजारों कर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी।

इतना ही नहीं, सरकार अब अमीनों को स्थायी करने की दिशा में भी गंभीर नजर आ रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इसके लिए परीक्षा आयोजित की जाएगी और उसमें सफल होने वाले अमीनों को परमानेंट करने पर विचार किया जा रहा है। इस फैसले ने संविदा और अस्थायी कर्मचारियों के बीच नई उम्मीद जगा दी है। विभागीय स्तर पर इसकी तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।सरकार अमीनों को क्षेत्र भ्रमण भत्ता और इंटरनेट खर्च देने पर भी मंथन कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि ऑनलाइन कार्य और लगातार फील्ड विजिट की वजह से अमीनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। ऐसे में उन्हें आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, ताकि कामकाज में सहूलियत मिल सके।

सबसे दिलचस्प चर्चा अमीनों के पदनाम बदलने को लेकर हो रही है। खबर है कि अब अमीनों को सहायक राजस्व अधिकारी के नाम से जाना जा सकता है। माना जा रहा है कि इससे न सिर्फ उनकी जिम्मेदारियों को नई पहचान मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक हैसियत भी मजबूत होगी।

सरकार की ओर से इन तमाम प्रस्तावों को लेकर आधिकारिक चिट्ठी जारी कर दी गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन फैसलों को अमली जामा पहनाने की प्रक्रिया तेज होगी। राजनीतिक गलियारों में इसे कर्मचारियों को साधने और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।