Bihar News: पटना में वैज्ञानिकों से भरी बस को आंतकियों ने किया हाईजैक! Bihar ATS की बड़ी कार्रवाई, ऐसे कराया मुक्त

Bihar News: पटना हाई कोर्ट परिसर में शनिवार को सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए एक विशेष लाइव डेमो का आयोजन किया गया। Bihar ATS द्वारा आयोजित इस मॉक ड्रिल में संवेदनशील हालात में आतंकी हमले से निपटने की रणनीति और त्वरित कार्रवाई की क्षमता का प्रदर्शन

पटना हाई कोर्ट में हुआ मॉक ड्रिल - फोटो : social media

Bihar News: पटना हाई कोर्ट परिसर में आज बिहार आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) की ओर से लाइव डेमो आयोजित किया गया। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य संवेदनशील स्थानों पर संभावित आतंकी हमले की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का प्रदर्शन करना था।

राजगीर जा रही वैज्ञानिकों को आतंकियों ने बनाया बंधक 

मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की मौजूदगी में आयोजित इस दक्षता प्रदर्शन में एक काल्पनिक परिदृश्य दिखाया गया। इसके तहत राजगीर जा रही भारतीय वैज्ञानिकों से भरी एक बस को पटना के फतुहा पुल के पास पांच आतंकियों द्वारा हाईजैक कर लिया जाता है।

एटीएस की टीम ने कराया मुक्त 

इसके बाद बिहार ATS की टीम मौके पर पहुंचकर ऑपरेशन चलाती है और सभी आतंकियों को निष्क्रिय (न्यूट्रलाइज) करते हुए बंधक बनाए गए वैज्ञानिकों को सुरक्षित मुक्त करा लेती है। इस मॉक ड्रिल के जरिए ATS की तैयारी, समन्वय और त्वरित कार्रवाई की क्षमता को प्रदर्शित किया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के अभ्यास से सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता और आपसी तालमेल को और मजबूत किया जाता है।

मॉक ड्रिल क्या होता है?

मॉक ड्रिल का सरल अर्थ है "आपातकालीन स्थिति का नकली अभ्यास"। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी संभावित आपदा (जैसे आग लगना, भूकंप, या आतंकवादी हमला) का कृत्रिम माहौल बनाकर अभ्यास किया जाता है, ताकि वास्तविक संकट के समय जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके। 

मॉक ड्रिल के मुख्य उद्देश्य

तैयारी की जाँच: यह परखना कि प्रशासन, सुरक्षा बल और आम लोग आपात स्थिति में कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देते हैं।

घबराहट कम करना: नियमित अभ्यास से लोगों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे वास्तविक संकट के समय शांत रहकर सही कदम उठा पाते हैं।

कमियों की पहचान: सुरक्षा प्रणालियों या बचाव योजनाओं में छिपी कमियों को वास्तविक आपदा आने से पहले पहचानना और सुधारना।

पटना से अनिल की रिपोर्ट