Bharat Tiwari Encounter: पूर्व DGP का बड़ा हमला, बोले- यह मुठभेड़ नहीं खाकी की आड़ में सीधी हत्या है

भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार के पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय ने पुलिस और सरकार को घेरा। फेसबुक लाइव में उन्होंने इस घटना को सीधे-सीधे हत्या करार दिया और दोषी पुलिसकर्मियों पर मर्डर केस दर्ज कर जेल भेजने की मांग की।

पूर्व DGP का बड़ा हमला, बोले- यह मुठभेड़ नहीं खाकी की आड़ में सीधी हत्या है- फोटो : Social Media

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में शनिवार (20 जून, 2026) को बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने अपने सोशल मीडिया लाइव के जरिए पुलिस और सरकार दोनों को सीधे कठघरे में खड़ा कर दिया है। पूर्व पुलिस कप्तान ने बेहद कड़े और बेबाक शब्दों में कहा कि प्रथम दृष्टया यह पूरा मामला किसी भी नजरिए से असली पुलिस मुठभेड़ का नहीं, बल्कि सीधे-सीधे हत्या का प्रतीत होता है। उन्होंने मृतक की पृष्ठभूमि को साफ करते हुए कहा कि भरत भूषण कोई चोर, डाकू, लुटेरा, आतंकवादी या नक्सलवादी नहीं था, बल्कि वह एक बीएससी (B.Sc) पास पढ़ा-लिखा युवक था, जो जवईनिया गांव के विस्थापितों और बाढ़ पीड़ितों के अधिकारों के लिए सोशल मीडिया पर लगातार संघर्ष कर रहा था।


व्यवस्था से लड़ते हुए हुआ असंतुलित: "सिर्फ गाली देने पर गोली मार देना कहां का न्याय?"

गुप्तेश्वर पांडेय ने इस घटना के पीछे के मानवीय और मनोवैज्ञानिक पहलू पर बात करते हुए कहा कि व्यवस्था और प्रशासन की घोर लापरवाही के खिलाफ लगातार लड़ते-लड़ते वह हताशा (Depression) के दौर में चला गया था। इसी निराशा के कारण वह मानसिक रूप से थोड़ा असंतुलित और दीवाना जरूर हो गया था, लेकिन पुलिस या प्रशासनिक व्यवस्था को गाली देना कभी भी इतना बड़ा अपराध नहीं माना जा सकता कि किसी नागरिक को सीधे गोली ही मार दी जाए। पूर्व डीजीपी ने पुलिस की आधिकारिक विज्ञप्ति पर भी तीखा तंज कसा, जिसमें भरत भूषण को 'विक्षिप्त' बताया गया था। उन्होंने सवाल दागा कि अगर वह मानसिक रूप से बीमार था, तो प्रशासन को पहले यह साबित करना होगा कि उसका इलाज किस अस्पताल में चल रहा था।


दूरी 200 मीटर और मारक क्षमता 30 मीटर: वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस की थ्योरी फेल

अपने लंबे पुलिसिया अनुभव का हवाला देते हुए पूर्व डीजीपी ने घटना के वायरल वीडियो का तकनीकी विश्लेषण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वीडियो में साफ दिख रहा है कि भरत भूषण और पुलिस बल के बीच की दूरी लगभग 200 मीटर से भी ज्यादा की थी। चूंकि एक साधारण पिस्तौल की मारक क्षमता (Firing Range) अधिकतम 30 मीटर तक ही होती है, इसलिए इतनी लंबी दूरी पर खड़ी और अत्याधुनिक हथियारों से लैस पुलिस टीम को उससे कोई वास्तविक जान का खतरा था ही नहीं। उन्होंने कहा कि जब युवक अपना हथियार फेंककर पूरी तरह आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर चुका था, तो उस निहत्थे व्यक्ति पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार करना पुलिस की कार्यप्रणाली और खाकी की साख पर एक ऐसा गहरा दाग है जिसे मिटाया नहीं जा सकता।


केवल सस्पेंशन नाकाफी: वर्दीधारी अपराधियों पर दर्ज हो मर्डर केस और चले स्पीडी ट्रायल

राज्य सरकार द्वारा अब तक की गई प्रशासनिक कार्रवाई को पूरी तरह नाकाफी बताते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा कि महज चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड (निलंबित) कर देने से पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने सरकार को उसका वादा याद दिलाते हुए कहा कि जब सूबे में यह नारा दिया जाता है कि 'कोई अपराधी बचेगा नहीं', तो न्याय का यह नियम वर्दीधारी अपराधियों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए। गुप्तेश्वर पांडेय ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि इस बर्बरता में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत हत्या (IPC 302/BNS) की एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए और नौकरी से बर्खास्त किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने मामले की निष्पक्षता के लिए हाई कोर्ट के जज की निगरानी में एसआईटी (SIT) जांच और स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की वकालत की है।