बिहार में 'सहयोग शिविर' का शंखनाद : सत्ता पक्ष ने बताया सुशासन की नई मिसाल, विपक्ष ने कसा यह तंज
Bihar Politics ; बिहार में प्रशासनिक व्यवस्था को सीधे आम जनता से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने सहयोग शिविर की शुरुआत की है। सत्ता पक्ष ने इसे सुशासन की नई मिसाल बताया है। वहीं विपक्ष ने इसपर तंज कसा है....
बिहार में 'सहयोग शिविर' का शंखनाद : सत्ता पक्ष ने बताया सुशासन की नई मिसाल, विपक्ष ने कसा यह तंज
Patna : बिहार में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए एक बड़ी पहल की शुरुआत की गई है। अब सरकार खुद जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं का मौके पर ही निपटारा करेगी। इसी कड़ी में हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को 'सहयोग शिविर' आयोजित करने के अभियान का आगाज हो गया है। इस अभियान की शुरुआत सारण जिले के सोनपुर विधानसभा क्षेत्र से हुई, जहां बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिविर में शिरकत की और अधिकारियों को आम जनता की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के कड़े निर्देश दिए।
एक महीने के भीतर हो निपटारा, नहीं तो होगी कार्रवाई:
शिविर को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि जनता की सेवा ही सरकार का परम कर्तव्य है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि अब सरकार सिर्फ सचिवालय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि खुद गांव-गांव जाकर लोगों की शिकायतें सुनेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि शिविर में प्राप्त सभी समस्याओं का निपटारा एक महीने के भीतर सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जाए। उन्होंने कहा कि पहले लोग दूर-दराज से अपनी फरियाद लेकर जनता दरबार आते थे, लेकिन अब सरकार खुद जनता के दरवाजे पहुंचेगी।
सत्ता पक्ष ने बताया सुशासन की नई मिसाल
सरकार की इस अनूठी पहल का सत्ता पक्ष के नेताओं ने पुरजोर स्वागत किया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यही असली लोकतंत्र और प्रजातंत्र है, जहां शासन खुद जनता के पास पहुंच रहा है। वहीं, भाजपा प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि सहयोग शिविर को गांव-गांव तक ले जाने का फैसला सुशासन की नई मिसाल पेश करेगा। इसके लिए समय सीमा (डेडलाइन) तय की गई है ताकि आम लोगों को वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
जेडीयू प्रवक्ता अंजुम आरा ने भी इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था लोगों को समय पर न्याय और समाधान दिलाएगी।
विपक्ष का तंज: वादों को पूरा करने में विफल है सरकार
दूसरी ओर, विपक्ष ने इस पूरे कार्यक्रम को लेकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे एक राजनीतिक स्टंट करार दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने सरकार पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि 'सहयोग कार्यक्रम' के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई, बदहाल कानून व्यवस्था और बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों पर पूरी तरह विफल हो चुकी है और अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसे आयोजन कर रही है। विपक्ष ने मांग की कि सरकार पहले अपने पुराने वादों को जमीन पर पूरा करके दिखाए।
स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक पहुंच बढ़ाना मुख्य उद्देश्य:
तमाम राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच, सोनपुर में आयोजित इस पहले सहयोग शिविर में स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने अपनी जमीनी समस्याओं, राशन, पेंशन और स्थानीय विकास से जुड़े मामलों को सीधे सरकार के समक्ष रखा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच को आसान बनाना है, ताकि आम नागरिकों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला मुख्यालय न जाना पड़े और उनकी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर ही न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
वंदना की रिपोर्ट