Bihar Teacher News: बिहार असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के नियम बदले! नए ड्राफ्ट ने उड़ाई उम्मीदवारों की नींद, अब सिर्फ डिग्री से नहीं चलेगा काम, देना होगा ये 'कठिन' टेस्ट

Bihar Teacher News: राज्य सरकार ने विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और योग्यता-आधारित बनाने के लिए एक नया 'भर्ती ड्राफ्ट' तैयार किया है। नए नियम के लागू होते ही सालों से चली आ रही 'केवल इंटरव्यू खत्म.

असिस्टेंट प्रोफेसर के नियम बदले!- फोटो : social media

Bihar Teacher News:  बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के नियम बदलेंगे। विश्वविद्यालयों में अब सहायत प्राध्यापकों की नियुक्ति अब परीक्षा से होगी। नए नियम के आने से वर्षों से चली आ रही केवल इंटरव्यू वाली परंपरा खत्म हो जाएगी। अब अभ्यर्थियों को अपनी काबिलियत साबित करने के लिए 160 अंकों की लिखित परीक्षा के कठिन दौर से गुजरना होगा। चयन प्रक्रिया में 80% वेटेज लिखित परीक्षा को और 20% वेटेज (40 अंक) इंटरव्यू को देने का प्रस्ताव है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब NET क्वालिफाइड और PhD डिग्री धारकों के लिए भी यह लिखित परीक्षा अनिवार्य होगी। 

BET दोबारा होगा शुरु

साथ ही, राज्य सरकार BET (Bihar Eligibility Test) को भी दोबारा शुरू करने की योजना बना रही है, ताकि स्थानीय मेधा को समान अवसर मिल सके। ऐसे में अगर आप भी बिहार के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे हैं, तो इन नए नियमों, पात्रता शर्तों और उम्र सीमा (न्यूनतम 23 वर्ष) को बारीकी से समझना आपके लिए बेहद जरूरी है। जानकारी अनुसार बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की नियुक्ति के लिए नई नियमावली तैयार की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 160 अंकों की लिखित परीक्षा और 40 अंकों का साक्षात्कार रखा गया है।

राज्यपाल ने कुलपतियों से मांगा सुझाव 

लोक भवन ने नई नियमावली का मसौदा राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को उनके हस्ताक्षर और सुझाव के लिए भेज दिया है। कुलपतियों से दस दिनों के भीतर अपना मंतव्य देने को कहा गया है। माना जा रहा है कि सभी कुलपतियों की सहमति मिलने के बाद इस नियमावली को जल्द ही लागू कर दिया जाएगा।

200 अंकों की होगी चयन प्रक्रिया

प्रस्तावित नियमावली के अनुसार सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति के लिए कुल 200 अंकों की चयन प्रक्रिया तय की गई है। इसमें 160 अंकों की लिखित परीक्षा होगी, जबकि 40 अंक साक्षात्कार के लिए निर्धारित होंगे। लिखित परीक्षा वर्णनात्मक (डिस्क्रिप्टिव) होगी, जिससे अभ्यर्थियों के विषय ज्ञान और विश्लेषणात्मक क्षमता का आकलन किया जा सकेगा। मसौदे में न्यूनतम आयु 23 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित की गई है। साथ ही चयन प्रक्रिया में अनुभव के लिए अलग से अंक देने का प्रावधान नहीं रखा गया है। इसी प्रकार नेट, जेआरएफ और पीएचडी जैसी योग्यताओं को केवल पात्रता के रूप में माना जाएगा, लेकिन इनके लिए अलग से अंक नहीं दिए जाएंगे। 

शिक्षकों की कमी दूर होने की उम्मीद

नियुक्ति की प्रक्रिया बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से कराई जाएगी। साक्षात्कार में शामिल सभी सदस्य प्रोफेसर रैंक के होंगे। यदि सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति इस नियमावली पर सहमति दे देते हैं, तो इसे 12 मार्च से पहले लागू किया जा सकता है। हालांकि यदि किसी प्रकार की आपत्ति या संशोधन की मांग आती है तो इसमें थोड़ी देरी हो सकती है। नियमावली लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। इससे न केवल शिक्षकों की कमी दूर होगी, बल्कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी और स्पष्ट चयन प्रक्रिया से योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा और विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

पात्रता के लिए जरूरी शर्तें

सहायक प्राध्यापक पद के लिए अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) या सीएसआईआर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) उत्तीर्ण करनी होगी। इसके अलावा यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त समान स्तर की राष्ट्रीय परीक्षा या बिहार सरकार द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा (स्लेट/सेट) भी मान्य होगी। हालांकि संबंधित विषय में पीएचडी डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों को नेट, स्लेट या सेट से छूट मिल सकती है, बशर्ते उनकी पीएचडी यूजीसी के एमफिल/पीएचडी डिग्री प्रदान करने के न्यूनतम मानक और प्रक्रिया विनियम 2009 या 2016 के अनुसार प्राप्त की गई हो।  इसके अलावा जिन अभ्यर्थियों ने 11 जुलाई 2009 से पहले पीएचडी कार्यक्रम में पंजीकरण कराया था, वे उस समय लागू नियमों के अनुसार पात्र माने जाएंगे।

पीएचडी अभ्यर्थियों के लिए अतिरिक्त शर्तें

नेट या राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा से छूट पाने के लिए पीएचडी अभ्यर्थियों को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। इनमें पीएचडी डिग्री का नियमित (रेगुलर) होना, शोधप्रबंध का मूल्यांकन कम से कम दो बाहरी परीक्षकों द्वारा किया जाना और ओपन पीएचडी वाइवा-वोसे का आयोजन शामिल है। इसके साथ ही अभ्यर्थी को अपने पीएचडी शोधकार्य से जुड़े कम से कम दो शोध पत्र प्रकाशित करने होंगे, जिनमें से एक रेफरीड जर्नल में होना जरूरी है। साथ ही पीएचडी कार्य से संबंधित दो शोध पत्र ऐसे सम्मेलन या सेमिनार में प्रस्तुत करने होंगे, जो यूजीसी, आईसीएसएसआर, सीएसआईआर या किसी समान एजेंसी द्वारा प्रायोजित या समर्थित हों। इन सभी शर्तों की पूर्ति का प्रमाण संबंधित विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार या डीन (एकेडमिक अफेयर्स/संबंधित संकाय) द्वारा प्रमाणित किया जाएगा।