Bihar special train: छठ पर बिहार लौटना महंगा! ट्रेन में लंबी वेटिंग, फ्लाइट और बसों के किराए में बड़ा उछाल

Bihar special train: दिवाली और छठ पर बिहार लौटने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। ट्रेनों में लंबी वेटिंग, फ्लाइट के बढ़ते किराए और महंगी बसों से लोग परेशान हैं।

 Bihar special train: अक्टूबर का महीना शुरू होते ही देशभर में त्योहारों का मौसम शुरू हो गया है। दुर्गा पूजा के बाद अब लोगों की नजर दिवाली और लोक आस्था के महापर्व छठ पर है। दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, बेंगलुरु और पंजाब जैसे शहरों में काम करने वाले लाखों बिहारियों के लिए यह समय बेहद खास होता है। छठ और दिवाली पर लोग अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए घर लौटना चाहते हैं।


लेकिन हर साल की तरह इस बार भी बिहार लौटने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी परेशानी सफर को लेकर है। त्योहार नजदीक आते ही ट्रेनों में सीट मिलना मुश्किल हो गया है। वहीं, फ्लाइट और बसों के किराए में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ऐसे में घर जाने की खुशी के साथ टिकट की चिंता भी बढ़ गई है।


ट्रेनों में पहले से ही लंबी वेटिंग


दिल्ली से पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जाने वाली कई ट्रेनों में त्योहार के समय भारी भीड़ है। संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, विक्रमशिला एक्सप्रेस, वैशाली एक्सप्रेस और सप्त क्रांति एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में टिकट की मांग काफी ज्यादा रहती है।कई तारीखों पर सीटें तेजी से भर रही हैं और यात्रियों को वेटिंग टिकट का सहारा लेना पड़ रहा है। कुछ रूट पर वेटिंग काफी लंबी पहुंच गई है। ऐसे में जिन लोगों ने समय रहते टिकट बुक नहीं किया, उनके लिए कन्फर्म सीट मिलना बड़ी चुनौती बन गया है। तत्काल टिकट के लिए भी यात्रियों के बीच काफी मारामारी रहती है। टिकट बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही समय में सीटें भर जाने के कारण बड़ी संख्या में लोगों को निराश होना पड़ता है।


पूजा स्पेशल ट्रेनों से कितनी राहत मिलेगी?


त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे स्पेशल ट्रेनें चलाता है। इन ट्रेनों से अतिरिक्त यात्रियों को घर पहुंचाने में मदद मिलती है। हालांकि, भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि स्पेशल ट्रेनें भी हर यात्री की जरूरत पूरी नहीं कर पातीं। कई बार स्पेशल ट्रेनों को दूसरे ट्रेनों को रास्ता देने के लिए ज्यादा समय तक इंतजार करना पड़ता है। इससे सफर का समय बढ़ सकता है। जिन यात्रियों को सामान्य दिनों में 12 से 15 घंटे का समय लगता है, उन्हें त्योहारों की भीड़ में ज्यादा समय सफर करना पड़ सकता है। जनरल और स्लीपर कोचों में भी भीड़ बढ़ जाती है। कई बार यात्री सीट न मिलने पर गलियारे और दरवाजे के पास खड़े होकर सफर करते हैं। लंबी दूरी के सफर में यह स्थिति यात्रियों के लिए काफी मुश्किल हो जाती है।


फ्लाइट का किराया भी बढ़ा


जब ट्रेन में टिकट नहीं मिलता, तो कई लोग फ्लाइट का विकल्प चुनते हैं। लेकिन त्योहारों के आसपास हवाई किराए में भी बढ़ोतरी हो जाती है। मांग बढ़ने के साथ एयरलाइंस की टिकट कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं। आम दिनों में दिल्ली से पटना की फ्लाइट का किराया करीब 4 से 5 हजार रुपये के आसपास मिल सकता है, लेकिन त्योहार के बेहद करीब टिकट बुक करने पर किराया काफी ज्यादा हो सकता है। कुछ तारीखों पर यह 15 हजार से 22 हजार रुपये या उससे भी ऊपर पहुंच सकता है। अगर परिवार के चार लोग एक साथ सफर कर रहे हों, तो सिर्फ एक तरफ का हवाई टिकट ही काफी महंगा पड़ सकता है। दिल्ली-पटना के अलावा दिल्ली-दरभंगा, मुंबई-पटना और बेंगलुरु-पटना जैसे रूट पर भी त्योहार के समय टिकट की मांग बढ़ जाती है।


बस भी बन रही है आखिरी उम्मीद


ट्रेन और फ्लाइट में टिकट नहीं मिलने पर बड़ी संख्या में लोग निजी बसों का सहारा लेते हैं। दिल्ली के आनंद विहार और कश्मीरी गेट के अलावा मुंबई, सूरत और दूसरे शहरों से बिहार जाने वाली बसों में भी त्योहार के समय मांग बढ़ जाती है। मांग बढ़ने पर कई बसों का किराया सामान्य दिनों के मुकाबले काफी ज्यादा हो सकता है। लंबी दूरी की स्लीपर बसों में यात्रियों को ज्यादा किराया देना पड़ता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग किसी तरह त्योहार से पहले घर पहुंचने की कोशिश करते हैं।


हर साल क्यों बढ़ती है परेशानी?


दिवाली और छठ के समय बिहार लौटने वाले यात्रियों की संख्या हर साल काफी बढ़ जाती है। यह परेशानी नई नहीं है। त्योहारों के दौरान सीमित ट्रेनों और बढ़ती मांग के कारण टिकट की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सिर्फ स्पेशल ट्रेन चलाने से इस समस्या का पूरा समाधान नहीं हो पाता। लंबे समय के लिए ज्यादा नियमित ट्रेनें, बेहतर रेल कनेक्टिविटी और यात्रियों की बढ़ती जरूरत के हिसाब से परिवहन व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है। बिहार से बाहर काम करने वाले लाखों लोग हर साल दिवाली और छठ के दौरान अपने घर लौटते हैं। ऐसे में त्योहारों के समय उनके लिए सुरक्षित, आसान और उचित किराए में सफर की सुविधा उपलब्ध कराना बड़ी जरूरत है।