Bihar Transport: नेशनल परमिट जारी करने में बिहार ने लगाई छलांग, 13वें पायदान पर पहुंचा राज्य, लॉजिस्टिक्स को मिला नया हौसला
Bihar Transport: राज्य की सियासत और सड़कों पर इस वक्त एक साथ रफ्तार बढ़ी है। नेशनल परमिट के मोर्चे पर बिहार ने ऐसा कदम बढ़ाया है, जिसने माल ढुलाई, कारोबार और सप्लाई चेन की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है।...
Bihar Transport: राज्य की सियासत और सड़कों पर इस वक्त एक साथ रफ्तार बढ़ी है। नेशनल परमिट के मोर्चे पर बिहार ने ऐसा कदम बढ़ाया है, जिसने माल ढुलाई, कारोबार और सप्लाई चेन की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि राज्य में लगातार नेशनल परमिट की संख्या बढ़ रही है, जिससे अंतरराज्यीय आवागमन आसान हुआ और रेल पर निर्भरता में कमी आई है। यह बदलाव सिर्फ परिवहन का नहीं, बल्कि तिजारत, रोज़गार और अर्थव्यवस्था की सेहत से भी जुड़ा हुआ है।
1 अप्रैल 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच बिहार में कुल 31,750 नेशनल परमिट जारी किए गए। इस आंकड़े के साथ बिहार 28 राज्यों की फेहरिस्त में 13वें पायदान पर पहुंच गया है। यह कोई मामूली बात नहीं, क्योंकि कुछ साल पहले तक राज्य इस दौड़ में पीछे माना जाता था। अब तस्वीर बदल रही है। पहले नंबर पर हरियाणा है, जहां 1,69,821 परमिट जारी हुए, जबकि राजस्थान (1,53,534) और उत्तर प्रदेश (1,21,876) भी आगे हैं। इसके बावजूद बिहार की बढ़त यह बताने के लिए काफी है कि सड़क आधारित लॉजिस्टिक्स में राज्य की हिस्सेदारी मजबूत हो रही है।
नेशनल परमिट दरअसल वह निज़ाम है, जिसके तहत मालवाहक वाहन बिना अलग-अलग राज्यों के परमिट लिए पूरे देश में आवाजाही कर सकते हैं। यही वजह है कि ट्रक ऑपरेटरों को सहूलियत मिली है, समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है और माल तेजी से मंडियों तक पहुंच रहा है। सियासी जुबान में कहें तो यह फैसला “अर्थव्यवस्था के पहियों को ग्रीस लगाने” जैसा है।
इसके फायदे सीधे आम आदमी तक पहुंचते हैं। अनाज, सब्जी, फल, दवाइयां और जरूरी सामान वक्त पर बाजार में आते हैं, जिससे कीमतें काबू में रहती हैं। सप्लाई चेन मजबूत होती है और जमाखोरी पर भी लगाम लगती है। साथ ही, परमिट फीस, टैक्स और अन्य शुल्क के जरिए सरकारी खजाने में इजाफा होता है, जो विकास योजनाओं के लिए ईंधन का काम करता है।
परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के जानकार मानते हैं कि नेशनल परमिट में बढ़ोतरी बिहार के लिए सियासी और आर्थिक दोनों मायनों में शुभ संकेत है। यह न सिर्फ कारोबारियों का भरोसा बढ़ाता है, बल्कि राज्य को राष्ट्रीय बाजार से मज़बूती से जोड़ता है। साफ है, अगर यह सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो आने वाले वक्त में बिहार सड़क से सरहद तक अपनी रफ्तार और बढ़ा सकता है।