Bihar News: बिहार के CO साहब समझते थे खुद को सबसे शातिर, एक झटके में छिन गई कुर्सी, कारण जान उड़ जाएगा होश, कहीं अगला नंबर आपका तो नहीं?

Bihar News: बिहार के सीओ साहब नकली सर्टिफिकेट के सहारे सरकारी नौकरी कर रहे थे। वहीं अब उनका भंडा फूटा तो अब कुर्सी तो छिनी ही साथ ही अब सरकार सीओ साहब से वेतन भी वापस लेगी। आइए जानते पूरा मामला क्या है..

सीओ साहब की पकड़ी गई चालाकी - फोटो : social media

Bihar News: बिहार के भूमि विभाग में सुधार लाने के लिए उपमुख्यमंत्री सह भू-राजस्व मंत्री विजय  सिन्हा की ओर से तमाम कोशिशें की जा रही है। विजय सिन्हा ने इसी बड़ी में एक शातिर सीओ को बर्खास्त कर दिया है। सीओ साहब फर्जी प्रमाणपत्र पर नौकरी कर रहे थे। मामले का खुलासा होने पर मंत्री विजय सिन्हा ने सख्त कदम उठाया है। दरअसल, जाली और कूटरचित शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त करने के आरोप में बिहार सरकार ने सुपौल सदर के पूर्व अंचलाधिकारी प्रिंस राज को सेवा से विमुक्त (बर्खास्त) कर दिया है।

सीओ साहब से छिनी कुर्सी 

शुक्रवार को राज्य मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार की नीति पूरी तरह पारदर्शी और कठोर है। सरकारी नियुक्ति में किसी भी प्रकार की जालसाजी, कूटरचना या फर्जी प्रमाण पत्र के लिए शून्य सहनशीलता अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जो लोग धोखाधड़ी कर नौकरी हासिल करते हैं, वे जनता को ईमानदार सेवा नहीं दे सकते और ऐसे लोगों के लिए प्रशासन में कोई स्थान नहीं है।

जांच में सामने आई दो नाम और जन्मतिथि की बात

विभागीय अभिलेखों के अनुसार, प्रिंस राज (पिता– रघुनंदन साह), ग्राम झिक्की, पोस्ट हिसार, जिला मधुबनी ने बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 60-62वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में चयन के दौरान वर्ष 2006 की माध्यमिक परीक्षा का अंकपत्र और प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था। यह प्रमाण-पत्र एसटीएसवाई हाई स्कूल, मनमोहन (मधुबनी) से जारी बताया गया था।

जाली सर्टिफेकिट ने ली नौकरी 

जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2004 में उन्होंने धर्मेंद्र कुमार नाम से हाईस्कूल, खिड़हर (मधुबनी) से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी। विशेष निगरानी इकाई द्वारा दर्ज कांड संख्या 04/2025 की जांच में खुलासा हुआ कि दो अलग-अलग नाम और जन्मतिथि से मैट्रिक परीक्षा पास की गई थी। आरोप है कि 2006 का प्रमाण-पत्र जाली तरीके से हासिल कर आयु और शैक्षणिक अर्हता सिद्ध करने के लिए इस्तेमाल किया गया।

बिहार बोर्ड ने रद्द किया प्रमाण-पत्र

मामले में निर्णायक मोड़ तब आया जब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना ने 1 अगस्त 2025 को वर्ष 2006 की माध्यमिक परीक्षा का अंकपत्र और प्रमाण-पत्र जालसाजी पाते हुए रद्द कर दिया। इसके बाद विभाग ने बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य प्राप्त किया, जिसमें आयोग ने नियमानुसार कार्रवाई के लिए विभाग को स्वतंत्र बताया। प्रिंस राज की पहली पदस्थापना राजस्व अधिकारी के रूप में चनपटिया (पश्चिम चंपारण) में हुई थी। विभाग अब उनसे अब तक प्राप्त वेतन की रिकवरी की भी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। 

आगे भी होगी कार्रवाई 

मंत्री विजय सिन्हा ने दोहराया है कि नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। बता दें कि लगातार अधिकारियों के प्रमाण पत्रों की जांच हो रही है। फर्जी प्रमाण पत्र होने पर नौकरी तो छिन ही जाएगी साथ ही वेतन की भी रिकवरी सरकार करेगी। सरकार ने सख्त आदेश सभी अधिकारियों को दे दिया है ताकी वो फर्जीवाड़े पर रोक लग सके।