Bihar kisan news: बिहार में पराली जलाने पर सख्ती, 1,807 किसानों का डीबीटी पंजीकरण निलंबित
Bihar kisan news: बिहार में पराली जलाने पर 2025-26 में 1,807 किसानों का डीबीटी पंजीकरण निलंबित। सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि रोकी गई, सरकार ने सख्ती बढ़ाई।
Bihar kisan news: बिहार में पराली जलाने के खिलाफ सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए वर्ष 2025-26 में अब तक 1,807 किसानों का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) पंजीकरण निलंबित कर दिया है। यह जानकारी कृषि विभाग द्वारा राज्य विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पराली जलाने की घटनाओं में शामिल पाए गए 1,758 किसानों की सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि रोक दी गई। इसके अलावा, इस वर्ष अब तक 49 और किसानों का डीबीटी पंजीकरण इसी तरह के उल्लंघन के कारण निलंबित किया गया है।
क्यों रोकी गई राशि?
डीबीटी प्रणाली के तहत किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं के अंतर्गत सीधे वित्तीय सहायता मिलती है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार शुक्ला ने बताया कि वायु प्रदूषण कम करने और मिट्टी की उर्वरता बचाने के लिए राज्य में पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही चेतावनी दे चुकी थी कि पराली जलाने वाले किसानों को सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता और सब्सिडी से वंचित कर दिया जाएगा। राज्य सरकार किसानों को रियायती दर पर बिजली, डीजल पर सब्सिडी और अन्य सुविधाएं देती है, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने पर ये लाभ रोक दिए जाते हैं।
पहले भी दी गई थी चेतावनी
अधिकारियों के अनुसार किसानों को कई बार जागरूक किया गया है कि वे खेतों में पराली न जलाएं। इसके बावजूद जो किसान ऐसा करते पाए गए, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम जन स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के हित में उठाया गया है।
जागरूकता अभियान और सब्सिडी
शुक्ला ने बताया कि सरकार पराली जलाने की प्रवृत्ति रोकने के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। साथ ही, फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि उपकरणों पर सब्सिडी भी दी जा रही है, ताकि किसान वैकल्पिक उपाय अपना सकें।
पिछले साल से कम हुई घटनाएं
बिहार आर्थिक सर्वेक्षण (2025-26) के अनुसार, वर्ष 2024 में 4,596 किसानों का डीबीटी पंजीकरण निलंबित किया गया था। इसकी तुलना में 2025 में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है। नीतीश सरकार का दावा है कि जागरूकता अभियानों का सकारात्मक असर हुआ है और अब कम किसान पराली जला रहे हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि दोषी पाए गए किसानों को प्रभावी रूप से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है और भविष्य में उन्हें किसान कल्याणकारी योजनाओं से वंचित किया जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।