Bihar Teacher news '-बीएड योग्यताधारी शिक्षकों को बड़ा झटका, नियुक्ति तिथि से प्रशिक्षित वेतनमान का दावा खारिज, हाई कोर्ट का हवाला भी फेल

बिहार के प्राथमिक स्कूलों में बहाल बीएड योग्यताधारी शिक्षकों को बड़ा झटका। शिक्षा विभाग ने नियुक्ति तिथि से प्रशिक्षित वेतनमान के दावे को 'आधारहीन' बताकर खारिज किया।

Patna - शिक्षा विभाग ने पटना हाई कोर्ट के निर्देश पर सुनवाई करते हुए प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत बीएड योग्यताधारी शिक्षकों के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने नियुक्ति तिथि से प्रशिक्षित वेतनमान की मांग की थी । विभाग ने अपने 9 पन्नों के आदेश (ज्ञापांक 1064) में स्पष्ट किया कि वादीगणों का दावा न केवल आधारहीन है, बल्कि यह मौजूदा नियमावली के विपरीत भी है 

NCTE की शर्तों का सख्त हवाला

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने आदेश में जोर दिया कि NCTE की अधिसूचना के अनुसार, कक्षा 1 से 5 में नियुक्त बीएड शिक्षकों के लिए 6 माह का 'सेतु पाठ्यक्रम' (ब्रिज कोर्स) अनिवार्य है । विभाग ने साफ किया कि बीएड डिग्री को डी.पी.ई. या डी.एल.एड. के बराबर कभी नहीं माना गया । इसलिए, ब्रिज कोर्स पूरा करने से पहले प्रशिक्षित वेतनमान का हक नहीं बनता और पिछली तारीख से लाभ देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है 

पुराने केस की 'नकल' की खुली पोल

शिक्षकों ने लाभ पाने के लिए एल.पी.ए. संख्या 1699/2013 के पुराने अदालती फैसले का सहारा लिया था । हालांकि, विभाग ने गहन समीक्षा के बाद पाया कि वह मामला 1999-2005 के बीच नियुक्त शिक्षकों का था, जिन्हें विभाग की गलती से प्रशिक्षण में देरी हुई थी । इसके विपरीत, वर्तमान वादीगण 2007 से 2017 के बीच अलग नियमावलियों के तहत नियुक्त हुए हैं, जहाँ विभाग की ओर से कोई देरी नहीं पाई गई 

बीएड डिग्री मात्र से वेतन वृद्धि संभव नहीं

शिक्षा विभाग ने अपने फैसले में यह कड़ा रुख अपनाया है कि अभ्यर्थी केवल बीएड योग्यता के आधार पर कक्षा 1 से 5 में पठन-पाठन हेतु पूर्ण प्रशिक्षित नहीं माने जा सकते । जब तक वे अनिवार्य ब्रिज कोर्स पूरा नहीं कर लेते, तब तक उन्हें प्रशिक्षित वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा सकता । विभाग ने यह भी पाया कि वादीगण अपने पक्ष में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दे सके कि उनके किसी जूनियर को उनसे पहले यह लाभ मिला हो 

हजारों शिक्षकों पर पड़ेगा असर

निदेशक (प्राथमिक शिक्षा) ने इस आदेश को सार्वजनिक करते हुए विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने और बक्सर सहित संबंधित जिलों के अधिकारियों को सूचित करने का निर्देश दिया है । इस फैसले से उन शिक्षकों को करारा झटका लगा है जो पिछले कई वर्षों का एरियर और वेतन वृद्धि पाने की उम्मीद में कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।