हवलदार भर्ती धांधली: 'बिक्रम सिंडिकेट' का मास्टरमाइंड बीरू सिंह बेनकाब, EOU की ताबड़तोड़ छापेमारी
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में सामने आया है कि इस पूरे पेपर लीक और नकल गिरोह की कमान बिक्रम के खौरैठा निवासी बीरू सिंह के हाथों में थी।बीरू BPSC तैयारी करने के नाम पर कोचिंग व गाइडेंस की आड़ में असल में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट चला रहा था
बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा आयोजित हवलदार इंस्ट्रक्टर भर्ती परीक्षा में हुई धांधली की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में सामने आया है कि इस पूरे पेपर लीक और नकल गिरोह की कमान बिक्रम के खौरैठा निवासी बीरू सिंह के हाथों में थी। बीरू सिंह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने और कराने के नाम पर कोचिंग व गाइडेंस की आड़ में असल में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट चला रहा था। यही मास्टरमाइंड अभ्यर्थियों को पास कराने का झांसा देकर लाखों रुपये के ठेके तय करता था। यह पूर्व में भी हाई कोर्ट प्यून परीक्षा में लिंक काण्ड में शामिल था बल्कि यही मुख्य सूत्रधार भी था।
मास्टरमाइंड बीरू और सॉल्वर गौतम की तलाश में EOU की ताबड़तोड़ छापेमारी
मामले का खुलासा होने के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की विशेष टीमें मुख्य सरगना बीरू सिंह और मास्टर सॉल्वर गौतम कुमार को दबोचने के लिए बिक्रम व आसपास के कई संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि सॉल्वर गौतम की गिरफ्तारी के बाद ही इस बड़े राज से पर्दा उठ सकेगा कि परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले उसे प्रश्नपत्र का सेट किस स्रोत या किस अधिकारी/केंद्र से प्राप्त हुआ था।
सॉल्वर से लेकर बिचौलिये तक: गिरोह में सभी के तय थे काम
इस सिंडिकेट में शामिल हर सदस्य का काम पहले से तय था। दादोपुर निवासी गौतम कुमार गिरोह के मास्टर सॉल्वर की भूमिका निभाता था, जो प्रश्नपत्र मिलते ही उसके सटीक उत्तर तैयार करता था। वहीं करसा गांव का रहने वाला राज समदर्शी उर्फ राजा मुख्य बिचौलिये की तरह काम करता था। राजा का काम परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को अपने जाल में फंसाना, उनसे डील फाइनल करना और पैसों का हिसाब-किताब बिठाना था।
यूपीआई ट्रेल और डिजिटल लेनदेन में वेद प्रकाश, गोलू और रिया शामिल
अभ्यर्थियों से वसूले जाने वाले रुपयों को ठिकाने लगाने के लिए डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया जाता था। करसा का ही निवासी वेद प्रकाश अभ्यर्थियों से मिले पैसों का ऑनलाइन व यूपीआई (UPI) लेनदेन संभालता था। इसके साथ ही बिक्रम का रोशन कुमार उर्फ गोलू और राजा की करीबी सहयोगी रिया कुमारी भी इस नेटवर्क में सक्रिय थे। ये दोनों परीक्षार्थियों के एडमिट कार्ड, रोल नंबर और आंसर-की जैसी जरूरी जानकारियां व्हाट्सएप व डिजिटल माध्यमों से एक-दूसरे तक पहुंचाने का काम करते थे।
व्हाट्सएप चैट, एडमिट कार्ड और बैंक ट्रांजैक्शन समेत कई साक्ष्य जब्त
जांच एजेंसी ने अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों की गहन फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल से व्हाट्सएप चैट, परीक्षा एडमिट कार्ड की पीडीएफ फाइलें, सॉल्व की गई आंसर-की की तस्वीरें और बैंक खातों के ट्रांजैक्शन प्रिंटआउट जैसे अहम साक्ष्य जब्त कर लिए हैं। ये ठोस डिजिटल व भौतिक सबूत अदालत में आरोपियों के खिलाफ केस को मजबूत बनाने और गिरोह की जड़ों तक पहुंचने में मददगार साबित होंगे।
पटना ब्यूरो की रिपोर्ट