Bihar Band: आज बिहार बंद! नहीं आएगी कचरा गाड़ी, बैंक भी रहेंगे ठप, काली पट्टी बांधकर सड़कों पर उतरेंगे निगम कर्मी, घर से निकलने से पहले जान ले खबर

Bihar Band: 12 फरवरी को देश की 10 से अधिक प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने भारत बंद का आह्वान किया है। इसका असर पूरे देश सहित बिहार में भी देखने को मिलेगा। आज काली पट्टी बांधकर निगम कर्मी सड़कों पर उतरेंगे। ऐसे में आपके लिए यह खबर आवश्यक है।

भारत बंद का आह्वान - फोटो : AI Image

Bihar Band:  केंद्र सरकार की श्रम, कृषि और आर्थिक नीतियों के विरोध में देश की 10 से अधिक प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने गुरुवार, 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल में बड़े पैमाने पर भागीदारी की संभावना जताई जा रही है, जिससे बैंकिंग और परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर के अनुसार, इस हड़ताल में करीब 30 करोड़ मजदूरों के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि देश के लगभग 600 जिलों में इसका असर देखने को मिल सकता है।

क्यों किया गया भारत बंद का आह्वान 

दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर 4 श्रम कोड लागू किए जाने के विरोध में देशभर की ट्रेड यूनियनों ने आज ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। इस हड़ताल का असर राजधानी पटना समेत पूरे बिहार में देखने को मिल सकता है। ऐक्टू सहित 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन, विभिन्न सेवा संघों और फेडरेशनों ने संयुक्त रूप से राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। हड़ताल के कारण बिजली,बैंकिंग,बीमा,परिवहन,स्वास्थ्य,गैस और जलापूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं के प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। पटना नगर निगम की सफाई व्यवस्था भी आज प्रभावित रह सकती है। 

सड़कों पर उतरेंगे विभिन्न वर्गों के कर्मचारी

राजधानी में हजारों मजदूर काली पट्टी बांधकर सड़कों पर उतरेंगे और विरोध प्रदर्शन करेंगे। ऐक्टू और महासंघ गोप गुट से जुड़े संगठनों के आह्वान पर खेत और ग्रामीण मजदूर,आशा कार्यकर्ता,रसोइया,आंगनबाड़ी सेविका,निर्माण मजदूर और संविदा कर्मी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होंगे। नगर निगम के कर्मचारी अदालतगंज से डाकबंगला चौराहा तक मार्च निकालेंगे। राज्य के अन्य जिलों और ग्रामीण इलाकों में भी प्रदर्शन की तैयारी की गई है।

मजदूरों का सरकार से मांग 

पटना नगर निगम चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने कहा कि पहले के 44 श्रम कानून मजदूरों के हित में थे लेकिन नए 4 श्रम कोड मालिकों के पक्ष में बनाए गए हैं। उनका आरोप है कि इससे यूनियन बनाने,हड़ताल करने,न्यूनतम मजदूरी पाने,पीएफ,ईएसआई, ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा जैसे अधिकार कमजोर होंगे। उन्होंने कहा कि पहले 25 लोगों से यूनियन बन सकती थी, जबकि अब 300 सदस्यों की शर्त रखी गई है, जिससे छोटे संगठनों को नुकसान होगा। मजदूर संगठनों की प्रमुख मांगों में 4 लेबर कोड को रद्द करना,न्यूनतम मजदूरी 700 रुपये प्रतिदिन तय करना,सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ देना और महंगाई-बेरोजगारी पर नियंत्रण शामिल है।

पहले निकाला गया था विरोध मार्च

हड़ताल को सफल बनाने के लिए 11 फरवरी को पटना में विरोध मार्च निकाला गया था। यह मार्च रामवतार शास्त्री गोलंबर,राजेंद्र नगर से लोहिया पार्क,कंकड़बाग तक गया था। प्रदर्शनकारियों ने आउटसोर्स एजेंसियों पर कर्मियों के शोषण,बायोमीट्रिक हाजिरी में गड़बड़ी से वेतन कटौती और वाहनों की मरम्मत लागत चालकों से वसूले जाने का भी विरोध किया। ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (AIRF) ने भी भारत बंद को नैतिक समर्थन दिया है। AIRF के महामंत्री शिव नारायण प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि चार श्रम कोड का भारतीय रेलवे मजदूर संगठन पुरजोर विरोध करता है और बंद का समर्थन करता है।