पटना हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति की बड़ी उपलब्धि: एक दिन में 189 मामलों का निपटारा, करोड़ों की सेटलमेंट राशि जारी

पटना हाई कोर्ट विधिक सेवा समिति ने 14 मार्च 2026 को विभिन्न श्रेणियों के लंबित मामलों के निपटारे की रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 280 मामलों पर विचार किया गया, जिनमें से 189 का सफलतापूर्वक निपटारा हुआ।

Patna - : न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने और लंबित मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में पटना हाई कोर्ट विधिक सेवा समिति ने शनिवार को महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। 14 मार्च 2026 को समिति द्वारा आयोजित प्रक्रिया के दौरान विभिन्न श्रेणियों के सैकड़ों मामलों की सुनवाई की गई।

एमएसीटी मामलों में बड़ी राहत

जारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक वित्तीय राहत मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के मामलों में मिली है। समिति ने एमएसीटी के कुल 98 मामलों को सुनवाई के लिए लिया, जिनमें से 28 मामलों का त्वरित निष्पादन किया गया। इन मामलों के निपटारे के एवज में कुल ₹2,11,31,425 (दो करोड़ ग्यारह लाख इकतीस हजार चार सौ पच्चीस रुपये) की सेटलमेंट राशि स्वीकृत की गई है, जो पीड़ितों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।

एमजेसी और सर्विस मामलों पर रहा जोर

समिति ने अवमानना (MJC) और सेवा संबंधी मामलों में भी उल्लेखनीय कार्य किया है:

  • MJC (Contempt) मामले: कुल 158 मामले उठाए गए, जिनमें से रिकॉर्ड 146 मामलों का निपटारा कर दिया गया।

  • सेवा संबंधी मामले : वेतन, भत्ते और सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े 22 मामलों को लिया गया, जिनमें से 15 का निष्पादन हुआ। इन श्रेणियों में निपटारे की उच्च दर न्याय प्रणाली के प्रति आम जनता के विश्वास को मजबूत करती है।


  • लंबित मामलों का विस्तृत लेखा-जोखा

रिपोर्ट दर्शाती है कि समिति ने आपराधिक शमनीय (Criminal Compoundable) मामलों में भी पहल की, जहाँ 2 मामले विचारार्थ लिए गए। हालांकि, भूमि अधिग्रहण, राजस्व मामले और बिजली/पानी के बिलों से संबंधित कुछ श्रेणियों में इस सत्र के दौरान निपटारा शून्य रहा। कुल मिलाकर, शनिवार को विचार के लिए आए 280 मामलों में से 189 मामले (लगभग 67%) पूरी तरह सुलझा लिए गए।

सुलभ न्याय की ओर बढ़ते कदम

पटना हाई कोर्ट विधिक सेवा समिति द्वारा समय-समय पर उठाए जाने वाले ये कदम आम आदमी को कोर्ट-कचहरी के लंबे चक्करों से बचाने में कारगर साबित हो रहे हैं। विशेषकर एमएसीटी और सर्विस मामलों में जिस तरह से निपटारा किया गया है, उससे स्पष्ट है कि समिति का ध्यान उन विषयों पर अधिक है जहाँ त्वरित आर्थिक या प्रशासनिक राहत की आवश्यकता है।