भारतीय किसान संघ का बड़ा ऐलान: सितंबर में होगा मंत्रियों का घेराव,'सैटेलाइट सिटी' के नाम पर जमीन छीनने का आरोप
भारतीय किसान संघ (BKS) ने अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार, 'सैटेलाइट सिटी' के नाम पर उपजाऊ जमीनों के अधिग्रहण और खाद की किल्लत को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आगामी सितंबर में मंत्रियों के घेराव का ऐलान
भारतीय किसान संघ (बिहार प्रदेश) के तत्वावधान में आयोजित 'किसान संवाद' कार्यक्रम में राज्य भर के किसानों, कृषि मजदूरों और महिला कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का नेतृत्व किसान नेता श्याम किशोर शर्मा ने किया, कार्यक्रम की शुरुआत दीपज्वलित कर किया गया जिसके बाद स्कूली बच्चियों ने स्वागत गीत गाकर अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री के. साई रेड्डी और बिहार प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार सहित संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।संवाद कार्यक्रम के दौरान संघ ने बिहार में कृषि क्षेत्र की बदहाली, भूमि अधिग्रहण में धांधली, अंचल कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार और जल-सिंचाई संकट जैसे गंभीर मुद्दों पर राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आगामी सितंबर माह में बड़े धरना-प्रदर्शन और विभागीय मंत्रियों के घेराव का ऐलान किया है।
भूमि अधिग्रहण और 'सैटेलाइट सिटी' के नाम पर किसानों को बेदखल करने की साजिश का आरोप
संघ ने केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण कानून पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भूमि अधिग्रहण के बदले चार गुना मुआवजा देने के नियम को राज्य सरकार और उसके अधिकारी जटिल प्रक्रिया में फंसाकर टालमटोल कर रहे हैं।इसके अलावा, बिहार सरकार द्वारा 'विकास' और 'सैटेलाइट सिटी' बनाने के नाम पर कई राजस्व ग्रामों का शहरीकरण किया जा रहा है, जिससे अत्यधिक उपजाऊ और अनाज का भंडार मानी जाने वाली जमीन छीनी जा रही है। संघ ने इसे "हिटलेरी फरमान" करार देते हुए सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार और जमाबंदी में गड़बड़ी
बिहार प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार के हस्ताक्षरित ज्ञापन में अंचल (अंचल/राजस्व) कार्यालयों में फैले संस्थागत भ्रष्टाचार को किसानों की सबसे बड़ी समस्या बताया गया।ऑनलाइन जमाबंदी: जमाबंदी की ऑनलाइन प्रक्रिया में भारी अशुद्धियाँ और गड़बड़ियाँ हैं, जिन्हें ठीक करने के नाम पर किसानों का उत्पीड़न हो रहा है।संघ का कहना है कि इस विषय में राज्यपाल और विभागीय मंत्रियों को बार-बार ज्ञापन देने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी के विरोध में सितंबर माह में विभागीय मंत्री का घेराव किया जाएगा।
खाद-उर्वरक की कालाबाजारी, MSP और खरीद का घटाया लक्ष्य
किसान नेताओं ने कहा कि कृषि सीजन की शुरुआत में खाद एवं उर्वरक (फर्टिलाइजर) की भारी किल्लत हो जाती है। बिचौलियों, खुदरा विक्रेताओं और भ्रष्ट पदाधिकारियों की मिलीभगत के कारण किसानों को ऊंचे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ता है। MSP और खरीद का दायरा: सरकार ने गेहूं और धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तो तय कर दिया है, लेकिन खरीद के लक्ष्य को लगातार घटाया जा रहा है। पैक्स (PACS) को केवल धान खरीद-बिक्री तक सीमित रख दिया गया है। संघ ने मांग की कि धान, गेहूं के साथ-साथ मक्का जैसी फसलों की भी पारदर्शी व समयबद्ध खरीद सुनिश्चित की जाए और बैंकों से कृषि ऋण आसानी से उपलब्ध कराया जाए।
उत्तरी बिहार में बाढ़ तो दक्षिणी बिहार में सूखा: सिंचाई परियोजनाओं की अनदेखी
बिहार की भौगोलिक विषमता पर चिंता जताते हुए संघ ने कहा कि उत्तर बिहार हिमालयी नदियों की बाढ़ से तबाह रहता है, जबकि दक्षिण बिहार में सूखे के हालात रहते हैं। अंग्रेजों के जमाने में बनी नहरों (सोन नहर और गंडक नहर) का आधुनिक विकास नहीं किया गया। राज्य में 10,000 से अधिक सरकारी नलकूप (ट्यूबवेल) सरकारी लापरवाही के कारण बंद पड़े हैं। दुर्गावती जल परियोजना (कैमूर), सकरी नदी परियोजना, कोयल नदी जोड़ परियोजना और नवादा डकरानाला परियोजना जैसी अति-महत्वपूर्ण सिंचाई योजनाएं वर्षों से अधर में लटकी हुई हैं।
महिला किसानों और मजदूरों के लिए विशेष मांगें
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (30 सितंबर): भारतीय किसान संघ ने कृषि में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी को रेखांकित करते हुए 30 सितंबर को दिल्ली में आयोजित होने वाले एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम में बिहार से भारी संख्या में महिलाओं के शामिल होने का आह्वान किया।
खेतीहर मजदूर और राम जी केंद्र योजना: खेतीहर मजदूरों के लिए 200 दिन के रोजगार की व्यवस्था को सीधे कृषि और किसानों से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे किसान और मजदूर दोनों लाभान्वित हो सकें।
वही संवाद के दौरान राजू सिंह, सुब्रत वासुदेव, शिव जी, किसान सुधांशु सिंह समेत सैकड़ों किसान उपस्थित रहे
बिक्रम से ऋषिकेश कुमार की रिपोर्ट