Bihar Land Mutation:नहीं दुरुस्त हो पा रहा जमीन का रिकॉर्ड! जमाबंदी में खामियों की खुल रही पोल, सरकारी जमीन भी निजी नामों में हैं दर्ज

Bihar Land Mutation: बिहार में जमीन के रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की सरकारी कवायद के बीच पटना जिले के आंकड़ों ने राजस्व व्यवस्था की पेचीदगी उजागर कर दी है।

बिहार में नहीं दुरुस्त हो रहा जमीन का रिकॉर्ड!- फोटो : social Media

Bihar Land Mutation: बिहार में जमीन के रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की सरकारी कवायद के बीच पटना जिले के आंकड़ों ने राजस्व व्यवस्था की पेचीदगी उजागर कर दी है। विभाग ने जमाबंदी सुधार एवं उत्तराधिकार नामांतरण विशेष अभियान के तहत 31 अक्टूबर तक गड़बड़ियों को दूर करने का लक्ष्य तय किया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन खामियों को दूर करने में वर्षों का वक्त लग गया, उन्हें महज 20 दिनों में कैसे दुरुस्त किया जाएगा।

पटना जिले के सभी 26 अंचलों में जमीन के रिकॉर्ड की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। ऑनलाइन जमाबंदी में त्रुटियों और सरकारी अभिलेखों में दर्ज गलतियों के कारण बड़ी संख्या में जमीन मालिकों को अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जमीन की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज और लगान जमा करने जैसे जरूरी काम भी कई मामलों में अटक रहे हैं। इस व्यवस्था की पेचीदगियों के बीच बिचौलियों और एजेंटों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

5.33 लाख जमाबंदी में खामियां

आंकड़ों के मुताबिक, पटना जिले में कुल 19,87,545 वैध जमाबंदियां हैं। इनमें 14,53,962 जमाबंदियां आदर्श यानी सही स्थिति में हैं, जबकि 5,33,583 जमाबंदियां इनवैलिड बताई गई हैं। त्रुटिपूर्ण जमाबंदी के मामले में पालीगंज में 53,081, बिहटा में 34,870 और पंडारक में 34,233 मामले दर्ज हैं।

रिकॉर्ड की गड़बड़ी का आलम यह है कि 1,05,549 जमाबंदियों में खाता संख्या ‘0’ दर्ज है, जबकि 3,01,306 जमाबंदियों में प्लॉट नंबर ‘0’ दर्ज किया गया है। शून्य खाता संख्या के मामलों में पंडारक 14,411 के साथ आगे है। वहीं शून्य प्लॉट संख्या के मामले में पालीगंज में 42,770 और बिहटा में 27,438 मामले बताए गए हैं।

सरकारी जमीन भी निजी नामों में दर्ज

रिकॉर्ड की एक और गंभीर विसंगति सरकारी जमीन से जुड़ी है। जिले के 26 अंचलों में 24,087 सरकारी जमीनें निजी लोगों यानी रैयतों के नाम दर्ज बताई गई हैं। इसके उलट शुद्ध सरकारी जमीन की केवल 802 जमाबंदियां दर्ज हैं।

मसौढ़ी में 2,336, फतुहा में 2,156, खुशरूपुर में 1,865, पुनपुन में 1,775 और बाढ़ में 1,384 सरकारी जमाबंदियां रैयतों के नाम दर्ज होने की बात सामने आई है।राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने विशेष अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने की बात कही है। अब निगाहें 31 अक्टूबर की समय-सीमा पर टिकी हैं। असली चुनौती यह है कि रिकॉर्ड की इन पुरानी और जटिल खामियों को तय समय में किस तरह जमीनी स्तर पर दुरुस्त किया जाता है, ताकि जमीन मालिकों को दफ्तरों की दौड़ और दस्तावेजी उलझनों से राहत मिल सके।