Bihar News:बिहार में अब लग्जरी कैरावैन से सैर करेंगे टूरिस्ट, इतने रूपए प्रति किलोमीटर की दर से होगी बुकिंग, सफ़र में कर सकेंगे सुकून की सवारी
Bihar News:बिहार में इस बार सत्ता के गलियारों से एक ऐसी ख़बर निकली है, जो बहस नहीं बल्कि सूबे की छवि बदलने की बात करती है।....
Bihar News:बिहार की सियासत में अक्सर तकरार, आरोप-प्रत्यारोप और सियासी बयानों की गर्मी हावी रहती है, लेकिन इस बार सत्ता के गलियारों से एक ऐसी ख़बर निकली है, जो बहस नहीं बल्कि बिहार की छवि बदलने की बात करती है। जुमे के दिन पटना के दरोगा राय पथ स्थित सिख हेरिटेज भवन परिसर से पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने दो नई लग्ज़री कैरावैन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल सिर्फ़ एक वाहन को सड़क पर उतारने की नहीं, बल्कि बिहार को सियासी सुर्खियों से निकालकर पर्यटन के नक़्शे पर चमकाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने इस मौके पर कहा कि विभाग राज्य में पर्यटन को रफ़्तार देने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। उनके मुताबिक़, बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम ने इन दोनों कैरावैन बसों को करीब 2 करोड़ 18 लाख रुपये की लागत से खरीदा है। हर कैरावैन में आठ यात्रियों के बैठने की क्षमता और चार स्लीपर बेड हैं, जो दो परिवारों के लिए आरामदेह सफ़र का वादा करते हैं। सियासी ज़ुबान में कहें तो यह विकास के उस नैरेटिव को मज़बूत करने की कोशिश है, जिसे सरकार लगातार पेश कर रही है।
पर्यटन सचिव निलेश देवरे ने बताया कि इन कैरावैन बसों को भारत बेंज कंपनी की चेसिस पर तैयार किया गया है। चार 360 डिग्री रिवॉल्विंग चेयर, एक आरामदायक सोफा, बाथरूम, किचन और टीवी जैसी सुविधाएँ इसे किसी चलती-फिरती मिनी होटल की शक्ल देती हैं। कैंपिंग के लिए जेनसेट और कैनोपी, हर स्लीपर पर रीडिंग लाइट और टीवी की व्यवस्था भी की गई है। हिफ़ाज़त के लिहाज़ से सीसीटीवी कैमरे और एसओएस बटन लगाए गए हैं, ताकि सफ़र महफूज़ भी रहे।
बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंदकिशोर के अनुसार, पर्यटक इन कैरावैन बसों को 75 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से, न्यूनतम 250 किलोमीटर के लिए बुक कर सकते हैं, जिस पर 5 प्रतिशत जीएसटी अलग से देना होगा। बुकिंग सिख हेरिटेज भवन स्थित कार्यालय, कौटिल्य विहार काउंटर या मोबाइल नंबर 8544418209 के ज़रिये की जा सकती है। सियासी ज़बान में कहें तो सरकार का यह क़दम विकास के वादों को ज़मीन पर उतारने की एक कोशिश है अब देखना यह है कि यह पहल सिर्फ़ फ़ाइलों और फीते तक सीमित रहती है या सचमुच बिहार को पर्यटन की नई पहचान दिला पाती है।