Bihar News : शंकराचार्य के अपमान पर कांग्रेस का तीखा हमला, कहा 'योगी सरकार ने वो किया जो मुगलों और अंग्रेजों ने भी नहीं किया'

Bihar News : शंकराचार्य के अपमान पर कांग्रेस का तीखा हमला, क

GAYAJI : उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के 46वें प्रमुख शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रयागराज माघ कुंभ मेले में शाही स्नान हेतु संगम तट जाने से रोकने और उनसे 'शंकराचार्य होने का प्रमाण' मांगने की घटना ने तूल पकड़ लिया है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष संतोषी पंडा, दामोदर गोस्वामी और अन्य नेताओं ने इस घटना की तीव्र भर्त्सना की है। कांग्रेस नेताओं ने इसे हिंदू धर्म के सर्वोच्च प्रतीक का अपमान बताते हुए प्रदेश सरकार के रवैये पर कड़ा रोष व्यक्त किया है।

सांप्रदायिक राजनीति पर प्रहार

विजय कुमार मिट्ठू और सुनील कुमार पासवान सहित अन्य नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि भाजपा और आरएसएस शुरू से ही अल्पसंख्यकों का विरोध करती रही है, लेकिन अब वे अपने असली स्वरूप में आकर हिंदुओं के सर्वोच्च संत का भी विरोध करने लगे हैं। शंकराचार्य जैसे पूज्य संत से उनकी पहचान का सबूत मांगना न केवल हास्यास्पद है, बल्कि इससे देश के करोड़ों हिंदू धर्मावलंबियों की आस्था को गहरी चोट पहुंची है। इस घटना से पूरे देश के श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश व्याप्त है।

दुर्व्यवहार और प्रताड़ना का आरोप

नेताओं ने आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 40 वर्षों से निरंतर कुंभ में शाही स्नान करते आ रहे हैं, इसके बावजूद इस बार उनकी पालकी को रोका गया। न केवल उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, बल्कि उनके शिष्यों को भी पुलिस प्रशासन द्वारा प्रताड़ित किया गया। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, यह पूरी घटना वर्तमान में देशवासियों के बीच चर्चा और विवाद का केंद्र बनी हुई है, जो धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं पर सीधा प्रहार है।

राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने शंकराचार्य को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि उन्होंने समय-समय पर भाजपा सरकार की गलत नीतियों की आलोचना की थी। इसमें अयोध्या मंदिर के उद्घाटन की तिथि का शास्त्रीय विरोध, कुंभ मेले के कुप्रबंधन और कोविड महामारी के दौरान गंगा में तैरते शवों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को आईना दिखाना शामिल था। इसी राजनीतिक खुन्नस के चलते प्रशासन ने उनके साथ ऐसा व्यवहार किया।

इतिहास का हवाला और निंदा

अंत में, नेताओं ने इस कृत्य की तुलना इतिहास के काले अध्यायों से करते हुए कहा कि शंकराचार्य को पवित्र शाही स्नान से रोकने का जो दुस्साहस भाजपा सरकार ने किया है, वैसा तो पूर्व की मुगल शासन और अंग्रेजी हुकूमत ने भी कभी नहीं किया था। विरोध जताने वालों में इंटक महासचिव मशान पुजारी, टिंकू गिरी, विपिन बिहारी सिन्हा, युगल किशोर सिंह, विद्या शर्मा, धर्मेंद्र कुमार निराला और शिव कुमार चौरसिया आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे, जिन्होंने इसे सनातन धर्म की मर्यादा का हनन बताया।