बिहार में नए सर्किल रेट लागू, जमीन की रजिस्ट्री हुई महंगी! जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

बिहार में नए सर्किल रेट लागू होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री नई दरों पर शुरू हो गई है। शहरी क्षेत्रों में सर्किल रेट दोगुना और ग्रामीण इलाकों में 1.6 गुना बढ़ाया गया है। जानिए इसका जमीन खरीदारों पर क्या असर पड़ेगा।

पटना: बिहार में जमीन और प्रॉपर्टी सेक्टर को लेकर बड़ा बदलाव शुरू हो चुका है। राज्य सरकार ने नए सर्किल रेट लागू कर दिए हैं, जिसके बाद जमीन की रजिस्ट्री नई दरों पर शुरू हो गई है। इसी बीच राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से पूरे बिहार में विशेष भूमि सर्वेक्षण अभियान भी तेज कर दिया गया है, जिसे वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन दोनों बड़े फैसलों का सबसे ज्यादा फायदा किसे मिलेगा? आम लोगों को, किसानों को या फिर बड़े बिल्डरों और टाउनशिप डेवलपर्स को?

नए सर्किल रेट से क्या बदला?

सरकार ने शहरी क्षेत्रों में जमीन का सर्किल रेट लगभग दोगुना और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1.6 गुना तक बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर जमीन की रजिस्ट्री पर पड़ने वाला है। अब जमीन खरीदने वालों को पहले की तुलना में अधिक स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क देना पड़ सकता है।

सरकार का तर्क है कि बाजार मूल्य और सरकारी मूल्य में बड़ा अंतर था। इसी अंतर को खत्म करने के लिए सर्किल रेट बढ़ाए गए हैं।

2027 तक पूरा होगा भूमि सर्वेक्षण

राजस्व मंत्री एवं बिहार भाजपा अध्यक्ष Dilip Jaiswal लगातार कह रहे हैं कि विशेष भूमि सर्वेक्षण का उद्देश्य जमीन संबंधी विवादों को कम करना और रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल एवं पारदर्शी बनाना है।

सरकार का लक्ष्य है कि 2027 तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया जाए। इसके बाद जमीन के वास्तविक मालिक, सीमांकन और रिकॉर्ड को लेकर स्थिति काफी स्पष्ट हो जाएगी।

बिल्डर और टाउनशिप को कैसे होगा फायदा?

भूमि विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में सबसे बड़ी समस्या जमीन के स्वामित्व और रिकॉर्ड को लेकर रही है। कई परियोजनाएं सिर्फ इसलिए अटक जाती हैं क्योंकि जमीन के कागजात स्पष्ट नहीं होते या कई पक्ष उस पर दावा कर देते हैं।

यदि सर्वेक्षण पूरा हो जाता है और रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल हो जाते हैं तो—

  • बड़े बिल्डरों को जमीन अधिग्रहण में आसानी होगी।

  • टाउनशिप परियोजनाओं की मंजूरी तेजी से मिल सकेगी।

  • निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

  • रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े निवेश आने की संभावना बढ़ेगी।

  • आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं को गति मिलेगी।

यानी सरकार जिस "नए बिहार" की बात कर रही है, उसमें भूमि सुधार और रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी भूमिका में देखा जा रहा है।

आम आदमी के लिए क्या है चुनौती?

जहां एक तरफ बिल्डरों और निवेशकों को फायदा मिलने की संभावना है, वहीं आम लोगों की चिंता अलग है।

नए सर्किल रेट के कारण:

  • जमीन खरीदना महंगा हो सकता है।

  • रजिस्ट्री का खर्च बढ़ सकता है।

  • मध्यम वर्ग के लिए प्लॉट खरीदना कठिन हो सकता है।

  • ग्रामीण इलाकों में भी जमीन की सरकारी कीमत बढ़ने का असर दिख सकता है।

सरकार से बड़े सवाल

सरकार का दावा है कि नए सर्किल रेट और भूमि सर्वेक्षण से पारदर्शिता आएगी और निवेश बढ़ेगा। लेकिन जनता पूछ रही है—

  • क्या जमीन खरीदना अब और महंगा नहीं हो जाएगा?

  • क्या सर्वेक्षण पूरा होने के बाद छोटे किसानों को भी उतना ही फायदा मिलेगा जितना बड़े निवेशकों को?

  • क्या बिल्डरों और टाउनशिप कंपनियों के लिए रास्ता आसान बनाया जा रहा है?

  • और सबसे बड़ा सवाल, क्या बिहार के आम लोगों को इस बदलाव का वास्तविक लाभ मिलेगा?

आने वाले वर्षों में बदलेगी तस्वीर?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि 2027 तक सर्वेक्षण पूरा हो जाता है और भूमि रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल हो जाते हैं, तो बिहार में रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लेकिन इसके साथ ही सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विकास की इस दौड़ में आम नागरिकों और किसानों के हित पीछे न छूट जाएं।

फिलहाल बिहार में जमीन, रजिस्ट्री और सर्वेक्षण को लेकर जो बदलाव शुरू हुआ है, उसका असर आने वाले कई वर्षों तक राज्य की अर्थव्यवस्था, रियल एस्टेट बाजार और आम लोगों की जिंदगी पर दिखाई देगा।  रिपोर्ट - अभिजीत भारद्वाज