Bihar MLC Election 2026: बिहार का सियासी दंगल और पर्पल पेन का चक्रव्यूह, 10 वैकल्पिक दस्तावेजों को मान्यता, MLC चुनाव में सियासी पारा हाई,दांव पर 150 उम्मीदवारों की किस्मत
Bihar MLC Election 2026: बिहार विधान परिषद के चुनावी रण में अब सरगर्मी अपने चरम पर है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में क्या कुछ दांव पर लगा है, आइए समझते हैं सियासी गलियारों की पूरी रिपोर्ट...
Bihar MLC Election 2026: बिहार की राजनीति में एक बार फिर विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। आगामी 23 अक्टूबर को होने वाले इन चुनावों के लिए राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच जबरदस्त घमासान देखने को मिल रहा है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से कुल 150 उम्मीदवार अपनी राजनीतिक किस्मत आजमाने मैदान में डटे हुए हैं। इस चुनाव में कुल 5,32,847 मतदाता 933 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग कर इन दिग्गजों के भाग्य का फैसला करेंगे।
बैंगनी पेन का फरमान और निष्पक्षता की जंग
निर्वाचन विभाग ने इस बार चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। चुनाव आयोग के फरमान के मुताबिक, मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार का चयन करने के लिए केवल बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही इस्तेमाल कर सकेंगे। यह पेन किसी अन्य माध्यम से नहीं, बल्कि मतदान केंद्र के भीतर ही पीठासीन पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। यदि किसी अन्य पेन या स्याही का इस्तेमाल किया गया, तो मतपत्र को सीधे तौर पर अमान्य घोषित कर दिया जाएगा।
प्रशासन ने आचार संहिता का कड़ाई से पालन कराने के लिए प्रमंडलीय आयुक्तों को मैदान में उतार दिया है। उम्मीदवारों के खर्च और मतदाताओं को लुभाने के हथकंडों पर नजर रखने के लिए जिलावार फ्लाइंग स्क्वॉयड टीमों की तैनाती की गई है। इसके अलावा, चुनाव प्रचार के दौरान नियमों का शिकंजा कसते हुए उम्मीदवारों को क्षेत्र भ्रमण के लिए केवल तीन गाड़ियों के इस्तेमाल की ही अनुमति दी गई है।
प्रशासनिक शिकंजा और राजनीतिक नुमाइंदगी
हाल ही में पटना प्रमंडल के आयुक्त राजेश कुमार ने पटना शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के अभ्यर्थियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर साफ कर दिया है कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अभ्यर्थियों को अपने निर्वाचन और मतदान अभिकर्ता नियुक्त करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में किसी भी तरह का विज्ञापन प्रसारित करने से पहले मीडिया प्रमाणन व निगरानी समिति कोषांग से पूर्वानुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि चुनावी मैदान में कोई भी गड़बड़ी या आचार संहिता का उल्लंघन होता है, तो उसकी शिकायत फोटो और वीडियो सबूत के साथ आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर पर की जा सकती है। इसके अलावा, चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त प्रेक्षकों के नंबर भी सार्वजनिक किए गए हैं ताकि पारदर्शिता पर कोई आंच न आए।
पहचान के कड़े विकल्प और दिग्गजों का इम्तिहान
मतदान केंद्रों पर अपनी पहचान साबित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने 10 वैकल्पिक दस्तावेजों को मान्यता दी है, जिसमें आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट और शैक्षणिक संस्थानों के सेवा पहचान पत्र शामिल हैं।इस पूरे चुनावी गणित को अगर आंकड़ों के आईने में देखें तो तस्वीर बेहद दिलचस्प नजर आती है:स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: 90 उम्मीदवार, 4,92,594 मतदाता और 598 मतदान केंद्र।शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: 60 उम्मीदवार, 40,253 मतदाता और 335 मतदान केंद्र।
कुल मिलाकर, यह चुनाव सिर्फ मोहर और कागजों का खेल नहीं है, बल्कि यह दिग्गजों की साख और सियासी वर्चस्व की एक ऐसी जंग है, जिसके नतीजे आने वाले दिनों में राज्य की राजनीतिक हवा का रुख तय करेंगे।
हीरेश कुमार