Bihar Monsoon: बिहार में 12 जून तक आ सकता है मानसून, लेकिन अल नीनो बिगाड़ सकता है पूरा खेल, जानें मौसम विभाग की चेतावनी
Bihar Monsoon: बिहार में 12 जून तक मानसून पहुंचने की संभावना है, लेकिन अल नीनो के असर से इस साल सामान्य से 20% कम बारिश हो सकती है। जानें मौसम विभाग का पूरा अनुमान।
Bihar Monsoon: बिहार में इस साल मानसून 12 जून के आसपास पहुंच सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि अगर बंगाल की खाड़ी में अनुकूल परिस्थितियां बनी रहीं तो मानसून तय समय से पहले भी राज्य में दस्तक दे सकता है। आमतौर पर बिहार में मानसून 15 जून के आसपास पहुंचता है।
इस बार मौसम वैज्ञानिकों ने अल नीनो के असर को लेकर चिंता जताई है। अल नीनो के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे राज्य में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। अनुमान है कि मानसून सीजन के दौरान बिहार में सामान्य से करीब 20 प्रतिशत कम वर्षा हो सकती है। ऐसी स्थिति में कई जिलों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं और जल संकट की समस्या भी बढ़ सकती है।
पटना से मौसम विज्ञान केंद्र का बयान
मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार, बिहार में मानसून की बारिश मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली हवाओं पर निर्भर करती है। लेकिन अल नीनो सक्रिय होने पर प्रशांत महासागर से गर्म हवाएं भारत की ओर बढ़ती हैं। ये हवाएं हिंद महासागर और अरब सागर से आने वाली ठंडी और नमी वाली हवाओं को कमजोर कर देती हैं। इसी वजह से मानसून का असर कम हो जाता है और बारिश में कमी आती है। मौसम विज्ञानी के अनुसार, अल नीनो मानसून की हवाओं को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि इसका प्रभाव ज्यादा बढ़ जाता है, जिसे सुपर अल नीनो कहा जाता है, तो बारिश में और अधिक कमी देखी जा सकती है।
बिहार में सामान्य से कम वर्षा होने के आसार
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जून और जुलाई के दौरान बिहार में सामान्य से कम वर्षा होने के आसार हैं। उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी बिहार के कुछ इलाकों को छोड़कर राज्य के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में बारिश की कमी ज्यादा महसूस की जा सकती है। इसका असर भूजल स्तर, पेयजल उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ सकता है। साथ ही सूखे की स्थिति भी बन सकती है।
बिहार के पिछले 10 साल के आंकड़े
पिछले 10 वर्षों के आंकड़े भी इस चिंता को बढ़ाते हैं। इस दौरान केवल तीन साल ऐसे रहे हैं जब बिहार में सामान्य से अधिक बारिश हुई। वर्ष 2020 में सबसे ज्यादा 1,272.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी, जबकि सामान्य वर्षा का स्तर 992.2 मिलीमीटर है। इसके अलावा 2019 में 1,050 मिलीमीटर और 2021 में 1,044.5 मिलीमीटर बारिश हुई थी। वहीं पिछले वर्ष यानी 2025 में बिहार में केवल 686.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से काफी कम थी। 2024 में 798.2 मिलीमीटर, 2023 में 760.5 मिलीमीटर और 2022 में 683.3 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
क्या है अल नीनो?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और मानसून की बदलती गतिविधियों के कारण पिछले कुछ वर्षों में वर्षा का पैटर्न लगातार बदल रहा है। इसका सीधा असर खेती और जल संसाधनों पर पड़ रहा है। अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमीय प्रक्रिया है, जो पृथ्वी की जलवायु को प्रभावित करती है। इसकी शुरुआत प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में होती है। जब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है, तो इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है। तापमान जितना अधिक बढ़ता है, अल नीनो का प्रभाव उतना ही मजबूत होता है।
अल नीनो के कारण बिहार में गर्मी भी बढ़ सकती
इस बार अल नीनो के कारण बिहार में गर्मी भी बढ़ सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच सकता है। जून महीने में कई जिलों में लू चलने की भी संभावना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जून और जुलाई के दौरान अल नीनो का प्रभाव लगभग 80 प्रतिशत तक रह सकता है। इससे बारिश कम होगी और गर्मी बढ़ेगी। हालांकि जुलाई के बाद मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिसके चलते अगस्त और सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई जा रही है।
खरीफ फसलों पर पड़ सकता है असर
कम बारिश का सबसे ज्यादा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। धान और मक्का जैसी फसलों की बुवाई तथा उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। किसान मानसून की अच्छी बारिश पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं, इसलिए इस बार मौसम की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।