बिहार MLC चुनाव: 30 साल पुराना समझौता होगा रद्द ... NDA विधायक दल की बैठक के पहले खूब गरजे संजय झा

संजय झा ने शुक्रवार को कहा कि विधान परिषद चुनाव को लेकर गठबंधन पूरी गंभीरता से तैयारी कर रहा है। बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनावी रणनीति तय करना और जीत की संभावनाओं को लेकर तैयारियों की समीक्षा करना है।

Bihar MLC election 2026- फोटो : news4nation

Bihar MLC election 2026 :  बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव को लेकर शुक्रवार को NDA विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। मुख्यमंत्री आवास पर होने वाली इस बैठक में चुनावी रणनीति, सभी सीटों पर जीत की तैयारी और गठबंधन के घटक दलों के बीच समन्वय को लेकर चर्चा होगी। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि NDA सभी आठ सीटों पर जीत हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। 


संजय झा ने शुक्रवार को कहा कि विधान परिषद चुनाव को लेकर गठबंधन पूरी गंभीरता से तैयारी कर रहा है। बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनावी रणनीति तय करना और जीत की संभावनाओं को लेकर तैयारियों की समीक्षा करना है। बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है। गौरतलब है कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और सारण सीट को लेकर एनडीए में आपसी तकरार है।


फरक्का जलसंधि के नवीनीकरण का विरोध

संजय झा ने भारत और बांग्लादेश के बीच फरक्का जलसंधि के नवीनीकरण को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बिहार के हितों और राज्य की जल जरूरतों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, जदयू इस मुद्दे को लेकर राज्य में नीतीश संवाद कार्यक्रम चला रहा है।


उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच 30 साल पुरानी फरक्का जलसंधि की अवधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है। ऐसे में इसके नवीनीकरण से बिहार के जल हितों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। संजय झा ने बताया कि हाल ही में दिल्ली में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और अन्य नेताओं ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तथा विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। इस दौरान बिहार के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाया गया।


SIR पर विपक्ष के विरोध को लेकर कांग्रेस पर निशाना

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस की ओर से दिल्ली में किए जा रहे प्रदर्शनों पर भी संजय झा ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बिहार से SIR की प्रक्रिया शुरू हुई थी और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। उनके दावे के मुताबिक, अदालत ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था।


संजय झा ने कहा कि मृत मतदाताओं के नाम हटाना, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नामों की समीक्षा करना और मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों को ठीक करना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि चुनाव जीतने पर राजनीतिक दल चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाते, लेकिन हारने के बाद इन्हीं संस्थाओं को निशाना बनाते हैं।


उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष का विरोध उचित नहीं है। SIR को लेकर राजनीतिक बहस के बीच अब बिहार में आगामी विधान परिषद चुनाव और NDA की रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हैं।

अभिजीत की रिपोर्ट