बिहार में ग्राम पंचायतों का बदल जाएगा रूप, गठित होंगी 5 हजार नई पंचायतें, परिसीमन और चुनाव प्रक्रिया तय !

बिहार में अभी करीब 8,053 ग्राम पंचायतें हैं। परिसीमन के बाद इनकी संख्या बढ़कर करीब 13 हजार तक पहुंचने की संभावना है। यानी करीब 5 हजार नई पंचायतें अस्तित्व में आ सकती हैं और मुखिया के पदों में लगभग 60-61 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

Bihar Panchayat Elections 2026- फोटो : news4nation

Bihar Gram Panchayat :  बिहार में इस वर्ष पंचायतों का मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद गांव की सरकार की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। नवंबर-दिसंबर 2026 में वर्तमान मुखिया, सरपंच समेत पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होना है। इसके पहले पंचायत चुनाव कराने की तैयारी है, लेकिन चुनाव से पहले होने वाला परिसीमन कई इलाकों का पूरा चुनावी गणित बदल देगा। बड़ी आबादी वाली पंचायतों का नए सिरे से बंटवारा हो सकता है और कई जगह नई ग्राम पंचायतों का गठन किया जा सकता है। इसका असर मुखिया, सरपंच और वार्डों की संख्या के साथ आरक्षण व्यवस्था पर भी पड़ेगा।


5 हजार नई पंचायतें

बिहार में अभी करीब 8,053 ग्राम पंचायतें हैं। परिसीमन के बाद इनकी संख्या बढ़कर करीब 13 हजार तक पहुंचने की संभावना है। यानी करीब 5 हजार नई पंचायतें अस्तित्व में आ सकती हैं और मुखिया के पदों में लगभग 60-61 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। मौजूदा करीब 8,053 मुखिया पदों की संख्या बढ़कर करीब 13 हजार हो सकती है। पंचायतों की संख्या बढ़ने के साथ सरपंच और ग्राम कचहरी से जुड़े पदों में भी इजाफा होने की संभावना है। इससे अगले पंचायत चुनाव में दावेदारों के लिए नए पद और नए चुनाव क्षेत्र सामने आएंगे।


500 की आबादी पर एक वार्ड

परिसीमन में 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। आबादी के अनुसार पंचायतों और वार्डों की नई सीमाएं तय होंगी। प्रस्तावित व्यवस्था में करीब 7 हजार की आबादी पर एक ग्राम पंचायत और लगभग 500 की आबादी पर एक वार्ड बनाने का प्रावधान बताया जा रहा है। इसके तहत अधिक आबादी वाले पंचायत क्षेत्रों को विभाजित किया जा सकता है, जबकि गांवों और टोलों को जरूरत के अनुसार दूसरी पंचायतों में शामिल किया जा सकता है। इसलिए मौजूदा पंचायत में रहने वाले मतदाताओं की पंचायत सीमा अगले चुनाव तक बदल सकती है।


परिसीमन की प्रक्रिया शुरू

परिसीमन का असर पंचायत चुनाव के आरक्षण पर भी पड़ेगा। नई पंचायतों और वार्डों की सीमाएं तय होने के बाद आरक्षण का नया चक्र लागू हो सकता है। ऐसे में 2021 के चुनाव में जिस सीट पर जिस वर्ग के लिए आरक्षण था, जरूरी नहीं कि अगले चुनाव में भी वही स्थिति रहे। इससे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों को परिसीमन और आरक्षण की अंतिम सूची जारी होने तक अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।


पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने भी तैयारी शुरू कर दी है। परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने से पहले आयोग विस्तृत दिशा-निर्देश और मानक तैयार करेगा। इन्हीं के आधार पर सभी जिलों में जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिलाधिकारी के माध्यम से पंचायत और वार्डों का परिसीमन कराया जाएगा। इसे लेकर आयोग के स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। परिसीमन पूरा होने के बाद पंचायतों की नई सीमाएं और पदों की संख्या स्पष्ट होगी।


बदल जाएगी पूरी रूप रेखा 

पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश ने भी समय पर पंचायत चुनाव कराने की कोशिश की बात कही है। हालांकि चुनाव की अंतिम तारीख परिसीमन और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं की गति पर निर्भर करेगी। ऐसे में 2026 के अंत तक बिहार में पंचायतों का मौजूदा ढांचा काफी हद तक बदल सकता है। नई पंचायतों के गठन के साथ हजारों नए पद सामने आएंगे और गांव की सरकार के चुनाव में इस बार दावेदारों से लेकर पंचायतों की सीमाओं तक, बहुत कुछ नया देखने को मिल सकता है।