Panchayat Sachiv Transfer: पंचायत सचिव तबादला घोटाला,मुर्दों और नौकरी छोड़ चुके कर्मचारियों का तबादला

Panchayat Sachiv Transfer: बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ ने राज्य के पंचायती राज मंत्री को ज्ञापन सौंपकर पंचायत सचिवों के तबादले और पदस्थापन में हुई भारी अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ...

चायत सचिव तबादला घोटाला- फोटो : reporter

Panchayat Sachiv Transfer:  बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ ने राज्य के पंचायती राज मंत्री को ज्ञापन सौंपकर  पंचायत सचिवों के तबादले और पदस्थापन (स्थानांतरण व ट्रांसफर) में हुई भारी अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ की पटना में हुई हंगामी बैठक में यह बात खुलकर सामने आई कि अफसरों और कर्मचारियों की मनमानी के चलते नियमावली की धज्जियां उड़ाई गई हैं।संघ के सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि यदि विभाग 603 पंचायत सचिवों का ट्रांसफर 2 सितंबर 2026 तक नहीं किया तो फिर आगे की रणनीति की घोषणा जल्द होगी।

मुर्दों और नौकरी छोड़ चुके मुलाज़िमों का भी तबादला

महकमे के सेक्शन-4 के कर्मियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की इस अजीबोगरीब कारस्तानी से महकमे की साख पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। सूची में ऐसी-ऐसी भयंकर गलतियां पाई गई हैं जो किसी बड़ी साज़िश और घपले की तरफ इशारा करती हैं:

मृत और पूर्व कर्मचारियों का ट्रांसफर: क्रमांक-875 पर दर्ज फूलचंद कुमार (पटना) की वफात (मृत्यु) पहले ही हो चुकी है, मगर उनका तबादला नवादा कर दिया गया।

इस्तीफा दे चुके मुलाज़िम शामिल: आनंद प्रकाश पांडेय (भागलपुर) और अमित राज (बक्सर) काफी अर्सा पहले अपने पद से इस्तीफा (त्यागपत्र) दे चुके हैं, फिर भी सूची में उनका नाम दर्ज है।

फर्जी नामों का खेल: सुजीत विश्वास, दीपक कुमार और गणेश कुमार जैसे तीन लोग इस पद पर तैनात ही नहीं हैं। अंदेशा है कि पिछले दरवाजे से नियुक्ति या व्यक्तिगत फायदे के लिए यह फर्जीवाड़ा किया गया।

मरीजों और महिलाओं की अनदेखी: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मुजफ्फरपुर के अविनाश कुमार का तबादला रोक दिया गया। वहीं, कई महिला कर्मियों (जैसे अलका कुमारी, रंजना श्री) का जायज हक मारा गया और दूसरों को 400 किलोमीटर दूर अररिया भेज दिया गया।

सीनियरिटी और कायदों को ताक पर रखकर नाइंसाफी

संघ का साफ-साफ इल्जाम है कि नियमावली 2025 और विभागीय निर्देशों के तहत पोर्टल पर 2,248 आवेदन मिले थे। लेकिन पहले सिर्फ 243 और बाद में 1,402 लोगों की सूची जारी की गई। इसमें बीएसएससी (BSSC) द्वारा तय की गई सीनियरिटी (वरीयता) को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। महिला, एससी/एसटी (SC/ST), ईबीसी/बीसी (EBC/BC) समेत करीब 603 पंचायत सचिवों के साथ सरेआम नाइंसाफी की गई है।

हाईकोर्ट की शरण में जाने की चेतावनी

संघ ने पंचायती राज मंत्री से इंसाफ की गुहार लगाते हुए इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, कसूरवारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और वंचित 603 पंचायत सचिवों के तबादले में सुधार करने का पुरजोर मुतालबा (मांग) किया है। संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर उनकी जायज मांगों पर तुरंत कदम नहीं उठाया गया, तो वे अपने हक और इंसाफ के लिए पटना हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) की शरण लेने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग की होगी।

रिपोर्ट- धीरेंद्र कुमार