बिहार बनेगा खनिज का नया पावरहाउस! दुर्लभ खनिजों की खुदाई से आएंगे 3 हजार करोड़, खुलेगा रोजगार का बड़ा द्वार

Bihar Mining:बिहार की धरती अब सिर्फ कृषि और उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि रणनीतिक खनिज संपदा के लिए भी नई पहचान बनाने जा रही है।

बिहार बनेगा खनिज का नया पावरहाउस!- फोटो : social Media

Bihar Mining:बिहार की धरती अब सिर्फ कृषि और उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि रणनीतिक खनिज संपदा के लिए भी नई पहचान बनाने जा रही है। राज्य में पहली बार रेयर अर्थ एलिमेंट यानी दुर्लभ खनिजों के खनन की तैयारी तेज हो गई है। इन खनिजों का इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा, रडार सिस्टम, ड्रोन, फाइटर जेट, पनडुब्बी और अंतरिक्ष तकनीक जैसे बेहद संवेदनशील क्षेत्रों में किया जाता है।

सरकार को उम्मीद है कि इस खनन परियोजना से राज्य के खजाने में करीब 3 हजार करोड़ रुपये का राजस्व आएगा। यह आमदनी सिग्नेचर बोनस, रॉयल्टी और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन फंड के जरिए होगी। इसके साथ ही बिहार में रोजगार के नए अवसरों का बड़ा रास्ता खुलने की संभावना है। अनुमान है कि इस परियोजना से सीधे तौर पर 40 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिल सकता है।

राज्य के सात जिलों में दुर्लभ खनिजों के भंडार की पहचान की गई है। गया में निकल, क्रोमियम, पैलेडियम और प्लैटिनम समूह के तत्व मिले हैं। रोहतास में ग्लोकोनाइट और पाइराइट, बांका में तांबा, सीसा, कोबाल्ट और एल्युमिनियम, भागलपुर में लैंथेनम, सीरियम, टाइटेनियम और क्रोमाइट जैसे खनिजों की मौजूदगी सामने आई है। वहीं नवादा में वैनेडियम और इल्मेनाइट तथा जमुई और जहानाबाद में मैग्नेटाइट और लौह अयस्क के भंडार मिले हैं।

इन खनिजों की अहमियत सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ी है। लैंथेनम और सीरियम जैसे तत्व परमाणु ऊर्जा और मिसाइल गाइडेंस सिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं कोबाल्ट और निकल का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी बनाने में होता है। ड्रोन, सुपरसोनिक इंजन और आधुनिक हथियारों के लिए जरूरी हाई टेम्प्रेचर अलॉय भी इन्हीं खनिजों से तैयार किए जाते हैं।

इस परियोजना से बिहार के उद्योग जगत को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। राज्य के करीब 300 उद्योगों को कच्चे माल के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी। परिवहन लागत घटने से बैटरी, मशीनरी और लोहे से जुड़े उत्पादों की कीमतों में भी कमी आ सकती है। इसके अलावा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और खनिज आधारित प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

वर्तमान में दुनिया के रेयर अर्थ एलिमेंट खनन पर चीन का दबदबा है। ऐसे में बिहार में दुर्लभ खनिजों का उत्पादन शुरू होना भारत की रणनीतिक मजबूती के लिए भी अहम माना जा रहा है।खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार, बिहार में दुर्लभ खनिजों के 14 ब्लॉक चिन्हित किए जा चुके हैं। केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर जल्द ही खनन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। अगर यह योजना जमीन पर उतरी तो बिहार देश के खनिज मानचित्र पर एक नई ताकत बनकर उभर सकता है।