Bihar Electricity: बिहार में बिजली का नया खेल, पीक टाइम में झटका, ऑफ-पीक में फायदा, नई सियासी चाल का जान लीजिए गुणा गणित
टाइम ऑफ डे टैरिफ के नाम पर लागू की गई नई व्यवस्था को जहां बिजली कंपनी लोगों के फायदे की स्कीम बता रही है, वहीं जानकार इसे आम आदमी के जेब पर बड़ा बोझ मान रहे है
Bihar Electricity: बिहार की सियासत में अब बिजली भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर रही है। टाइम ऑफ डे (TOD) टैरिफ के नाम पर लागू की गई नई व्यवस्था को जहां बिजली कंपनी लोगों के फायदे की स्कीम बता रही है, वहीं जानकार इसे आम आदमी के जेब पर बड़ा बोझ मान रहे है तो इसके सियासी मायने भी तलाशे जा रहे हैं। दिन में सस्ती और शाम होते ही महंगी बिजलीये फ़ैसला राहत है या दबाव, इस पर बहस तेज़ हो गई है।
कंपनी का दावा है कि ये कदम उपभोक्ता हित में उठाया गया है और देश के 22 राज्यों में पहले से लागू है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के उपभोक्ता अधिकार (संशोधन) नियम 2023 और राष्ट्रीय टैरिफ नीति 2016 के तहत बिहार में इसे लागू किया गया है। हुकूमत यह भी कह रही है कि 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सहूलियत बदस्तूर जारी रहेगी, जिससे ग़रीब और मध्यम वर्ग को राहत मिलती रहेगी।
बिजली का सबसे ज्यादा इस्तेमाल लोग शाम से रात में हीं करते हैं उसी समय का रेट बढ़ा दिया गया है और कंपनी पक्ष में तर्क दे रही है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पहले से हीं महंगाई की मार से त्रस्त जनता के पाकेट पर बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है।
नई व्यवस्था के मुताबिक सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ऑफ-पीक समय में बिजली सस्ती दर पर मिलेगी। वहीं शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक पीक आवर में बिजली महंगी होगी, जबकि रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक सामान्य दर लागू रहेगी। कंपनी का कहना है कि अगर उपभोक्ता अपने इस्तेमाल का वक़्त बदल लें, तो बिना कुल खपत घटाए भी हर महीने अच्छी-खासी बचत मुमकिन है।
सियासी गलियारों में इस फैसले को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। हुकूमत इसे रिफॉर्म और स्मार्ट मैनेजमेंट का हिस्सा बता रही है, जबकि कुछ हलकों में इसे आम आदमी पर नया बोझ करार दिया जा रहा है। खासकर उन लोगों के लिए, जिनकी दिनचर्या शाम के वक्त ज्यादा बिजली खपत पर निर्भर है, ये फैसला मुश्किलें बढ़ा सकता है।
कंपनी का दावा है कि करीब 90 फीसदी घरेलू उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य हो सकता है, बशर्ते वे स्मार्ट मीटर के जरिए अपनी खपत को समझदारी से मैनेज करें। अब सवाल ये है क्या ये नई बिजली नीति वाकई राहत का पैगाम है, या सियासत की बिसात पर खेला गया एक नया दांव? आने वाले दिनों में अवाम की प्रतिक्रिया ही इसका असली फैसला करेगी।