बिहार के राजस्व न्यायालयों में 'AI' का प्रवेश: अब ChatGPT और Gemini की मदद से सुलझेंगे जमीन के विवाद! सर्कुलर जारी

बिहार सरकार ने राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए एक क्रांतिकारी फैसला लिया है, जिसके तहत अब अदालती कार्यवाही में AI (ChatGPT/Gemini) के सहयोग की अनुमति दी गई है ।

Patna - बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित पड़े लाखों मामलों को तेजी से सुलझाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है । विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब राजस्व न्यायालयों के कामकाज में ChatGPT और Gemini जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपकरणों के सहयोग की आधिकारिक अनुमति दे दी गई है । यह निर्णय विशेष रूप से तब लिया गया है जब 'समृद्धि यात्रा 2026' की समीक्षा के दौरान राजस्व वादों के निष्पादन की प्रगति असंतोषजनक पाई गई 

हड़ताल के बीच न्यायालयों के संचालन की चुनौती

वर्तमान में बिहार के अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश (हड़ताल) पर होने के कारण राजस्व न्यायालयों का कार्य काफी प्रभावित हुआ है । समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने कर्मचारियों की अनुपस्थिति का हवाला देकर काम रुकने की बात कही थी, जिसे देखते हुए विभाग ने वैकल्पिक और प्रभावी मार्गदर्शक सिद्धांत जारी किए हैं । सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि हड़ताल की स्थिति में भी प्रमंडलीय आयुक्त, समाहर्त्ता और भूमि सुधार उप समाहर्त्ता (DCLR) के न्यायालयों में वादों का निष्पादन बाधित नहीं होना चाहिए 

अदालती कार्यवाही के लिए सात कड़े नियम

राजस्व वादों के त्वरित निपटारे के लिए विभाग ने सात सूत्रीय निर्देश लागू किए हैं । इसके तहत किसी भी परिस्थिति में बिना विधिवत नोटिस के एकतरफा (ex-parte) आदेश पारित करने पर रोक लगा दी गई है । इसके साथ ही, अब अदालती कार्यवाही में किसी भी पक्ष को 'Adjournment' (तारीख) नहीं दी जाएगी और दोनों पक्षों को अपना लिखित बयान (Written Statement) दाखिल करने का केवल एक ही अवसर प्रदान किया जाएगा । किसी भी मामले में तीन दिनों से अधिक की सुनवाई केवल अपवाद स्वरूप ही की जा सकेगी 

15 अप्रैल तक का 'मिशन मोड' लक्ष्य

सरकार ने सभी अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों को 18 मार्च 2026 से 15 अप्रैल 2026 तक की अवधि के लिए एक विस्तृत कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया है । इस विशेष अवधि का लक्ष्य सभी स्तरों पर लंबित पड़े वादों का नियमसंगत निपटारा सुनिश्चित करना है । विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान पूरी पारदर्शिता के साथ चलाया जाए और सभी अंतिम आदेश सकारण (तर्कपूर्ण) होने चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की गुणवत्ता बनी रहे 

तकनीक और जवाबदेही पर जोर

इस सर्कुलर को पूर्व में जारी पत्रांक-1038 और 1039 की निरंतरता में माना गया है, जो विभाग की प्रशासनिक सक्रियता को दर्शाता है । आदेश की प्रतिलिपि आईटी मैनेजर और वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है ताकि डिजिटल स्तर पर इसकी प्रभावी निगरानी की जा सके । सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक (AI) के समावेश और कड़े नियमों के पालन से न केवल फाइलों का बोझ कम होगा, बल्कि आम जनता को समय पर न्याय भी मिल सकेगा