सावधान! अब दफ्तर से गायब नहीं हो पाएंगे राजस्व अधिकारी, जानें मुख्यमंत्री के 'सात निश्चय-3' का वो नया नियम जिसने सबको चौंकाया

बिहार में राजस्व से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है। अब सप्ताह में दो दिन राजस्व पदाधिकारी कार्यालय में बैठकर जनता की बात सुनेंगे। शिकायतों की डिजिटल मॉनिटरिंग होगी ताकि काम में कोई ढिलाई न रहे।

Patna  - बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक जन-हितैषी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। राज्य सरकार के नए निर्णय के अनुसार, अब सभी राजस्व पदाधिकारी सप्ताह के दो कार्य दिवस, सोमवार और शुक्रवार को अनिवार्य रूप से अपने कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। यह व्यवस्था 19 जनवरी से पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएगी, जिसका मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों को सीधे सुनना और उनका त्वरित समाधान करना है। 

'सबका सम्मान–जीवन आसान': शिकायतों की होगी डिजिटल मॉनिटरिंग

उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लागू 'सात निश्चय-3' के तहत राजस्व प्रशासन का लक्ष्य नागरिकों के जीवन को आसान बनाना है।

  • जवाबदेह व्यवस्था: सोमवार और शुक्रवार को होने वाली जन-सुनवाई के दौरान प्राप्त शिकायतों का डिजिटल संधारण अनिवार्य किया गया है।

  • पारदर्शिता: शिकायतों के डिजिटल संधारण से उनकी निगरानी आसान होगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।

  • सम्मानजनक व्यवहार: उपमुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं कि कार्यालयों में आम नागरिकों के साथ सम्मानपूर्ण और शालीन व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।

    प्रशासनिक सुधार: जन संवाद कार्यक्रमों के अनुभव का असर

राजस्व विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल द्वारा जारी पत्र के अनुसार, यह निर्णय हाल के महीनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में आयोजित 'जनकल्याण संवाद' कार्यक्रमों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर लिया गया है।

  • संवाद से समाधान: पटना, लखीसराय, मुजफ्फरपुर, सहरसा, पूर्णिया और भागलपुर जैसे जिलों में आयोजित इन कार्यक्रमों में आम लोगों ने सीधे अपनी समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखी थीं।

  • नेतृत्वकारी भूमिका: प्रमंडलीय आयुक्तों और जिला समाहर्ताओं (DM) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस व्यवस्था का नेतृत्व करें और यह सुनिश्चित करें कि राजस्व प्रक्रियाओं के कारण नागरिकों को कठिनाई न हो। 

    राजस्व प्रशासन को संवेदनशील बनाने की पहल

सरकार का मानना है कि राजस्व प्रशासन का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि समस्याओं का पारदर्शी समाधान करना है। सोमवार और शुक्रवार की अनिवार्य उपस्थिति से उन ग्रामीण और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अक्सर अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। 19 जनवरी से लागू होने वाली यह व्यवस्था बिहार में 'गुड गवर्नेंस' को और अधिक सशक्त बनाएगी।