Bihar News : राजगीर में बनेगा बिहार का पहला स्पोर्ट्स साइंस सेंटर, ओडिशा मॉडल पर खिलाड़ियों को मिलेगी ट्रेनिंग और रिकवरी सुविधा
Bihar News : राजगीर स्थित राज्य खेल अकादमी में स्पोर्ट्स Science Center की स्थापना को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। इस प्रोजेक्ट के लिए अगले सप्ताह टेंडर की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।
PATNA : खेल विज्ञान और आधुनिक तकनीक के सहारे राज्य के खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। राजगीर स्थित राज्य खेल अकादमी में अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस सेंटर (उच्च प्रदर्शन खेल प्रशिक्षण एवं इंजरी सेंटर) की स्थापना को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। खास बात यह है कि इसके लिए अगले सप्ताह टेंडर की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। खेल विभाग इस सेंटर को ओडिशा मॉडल पर विकसित करेगा। वहां संचालित उच्च प्रदर्शन खेल सुविधाओं और खेल विज्ञान की बारीकियों को समझने के लिए विभाग की टीम को रवाना किया गया है। टीम वहां की व्यवस्थाओं, तकनीक, प्रशिक्षण प्रणाली और खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जा रही वैज्ञानिक सुविधाओं का अध्ययन करेगी, ताकि बिहार में विकसित होने वाला सेंटर आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
बदलते खेल परिदृश्य की जरूरत बना स्पोर्ट्स साइंस
आज के दौर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के लिए केवल पारंपरिक प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन का वैज्ञानिक विश्लेषण, शरीर की क्षमता के अनुरूप प्रशिक्षण, चोट की रोकथाम और मानसिक मजबूती खेल की तैयारी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। इसी जरूरत को देखते हुए बिहार में पहली बार समर्पित स्पोर्ट्स साइंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है।
अत्याधुनिक तकनीक से होगा प्रदर्शन का आकलन
सेंटर में बायोमैकेनिक्स एवं परफॉर्मेंस एनालिसिस लैब, मोशन कैप्चर और 3डी कैमरा सिस्टम की मदद से खिलाड़ियों की रनिंग तकनीक, थ्रोइंग एक्शन और जंपिंग पॉश्चर का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाएगा। फोर्स प्लेट्स के माध्यम से दौड़ने और कूदने के दौरान पैरों पर पड़ने वाले दबाव तथा ग्राउंड रिएक्शन फोर्स का आकलन होगा। स्पोर्ट्स फिजियोलॉजी एवं टेस्टिंग के तहत एडवांस ट्रेडमिल और मास्क एनालिसिस से फेफड़ों एवं हृदय की ऑक्सीजन क्षमता की जांच की जाएगी। वहीं, लैक्टेट थ्रेशोल्ड टेस्टिंग से थकान और शरीर में लैक्टिक एसिड बनने की सीमा का पता लगाया जाएगा। इन रिपोर्टों के आधार पर खिलाड़ियों के लिए उनकी क्षमता और खेल की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण योजना तैयार की जा सकेगी।
चोट के बाद जल्द मैदान में लौटेंगे खिलाड़ी
सेंटर में आधुनिक फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन की सुविधा होगी। हाइड्रोथेरेपी यूनिट, हॉट टब थेरेपी, लेजर थेरेपी, अल्ट्रासाउंड थेरेपी, ड्राई नीडलिंग और क्रायोथेरेपी जैसी सुविधाओं के साथ एंटी-ग्रेविटी ट्रेडमिल भी उपलब्ध होगा। इससे गंभीर चोट से जूझ रहे खिलाड़ी कम बॉडी-वेट पर चलने और दौड़ने का अभ्यास दोबारा शुरू कर सकेंगे।
डाइट से लेकर मानसिक मजबूती तक विशेषज्ञ सलाह
स्पोर्ट्स न्यूट्रिशनिस्ट खिलाड़ियों की खेल और शारीरिक जरूरत के अनुसार डाइट (खुराक) प्लान तैयार करेंगे। वहीं, स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट प्रतियोगिताओं के दबाव से निपटने, आत्मविश्वास बढ़ाने और मानसिक मजबूती विकसित करने में खिलाड़ियों की मदद करेंगे। इस तरह सेंटर में खिलाड़ी के प्रदर्शन के साथ उसके पोषण, फिटनेस, मानसिक मजबूती और चोट से उबरने—सभी पहलुओं पर एक साथ काम किया जाएगा।
मंत्री ने कहा
बिहार सरकार खेल मंत्री श्रेयसी सिंह खेल विभाग का लक्ष्य गांव-कस्बों की प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं देना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है। स्पोर्ट्स साइंस सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। भारत में होने वाले आगामी कॉमनवेल्थ और ओलंपिक गेम्स में बिहार के ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा लें और मेडल जीतें, इसी उद्देश्य से राज्य में खेल के क्षेत्र में लगातार काम किया जा रहा है।