Bihar Satellite Township: बिहार में सैटेलाइट टाउनशिप पर किसानों का विरोध तेज, जमीन के मुआवजे और नए कानून पर क्यों छिड़ी जंग?

Bihar Satellite Township: बिहार के 11 सैटेलाइट टाउनशिप प्रोजेक्ट और सिटी डेवलपमेंट एक्ट 2026 पर किसानों ने सवाल उठाए हैं। जानें जमीन, मुआवजे, पुनर्वास और नवंबर में प्रस्तावित किसान मार्च से जुड़ी पूरी जानकारी।

 Bihar Satellite Township: बिहार में 11 सैटेलाइट टाउनशिप बनाने की योजना को लेकर किसानों और किसान संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शहरों के विकास के नाम पर किसानों की जमीन, खेती और भविष्य की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। किसान संगठनों ने बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट, 2026 के प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने जमीन के इस्तेमाल, मुआवजे, पुनर्वास और किसानों के अधिकारों को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। इस मुद्दे पर पटना में किसान नेताओं ने अपनी चिंताएं सामने रखीं।


किसान संगठनों का कहना है कि वे शहरी विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास की योजना ऐसी होनी चाहिए जिससे किसानों की जमीन और आजीविका सुरक्षित रहे। संगठनों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों पर एक महीने के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो नवंबर में पटना में किसान मार्च निकाला जाएगा।


बिहार के 11 शहरों में बनेगी सैटेलाइट टाउनशिप


बिहार सरकार ने राज्य में नियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई है। इसके तहत पटना, गया, सोनपुर, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर और सीतामढ़ी में नए शहरी क्षेत्र विकसित किए जाने हैं। इन टाउनशिप में सड़कों, आवास और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के लिए योजनाबद्ध तरीके से जमीन का विकास किया जाना है।


सरकार का उद्देश्य शहरों के विस्तार को व्यवस्थित करना और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बुनियादी ढांचा तैयार करना है। हालांकि, किसान संगठनों का कहना है कि इन योजनाओं में शामिल जमीन, उसके इस्तेमाल और अधिग्रहण या लैंड पूलिंग की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।


11 टाउनशिप में कितनी जमीन पर होगा विकास?


प्रस्तावित टाउनशिप के कोर एरिया को लेकर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अलग-अलग शहरों में विकास के लिए अलग-अलग क्षेत्र तय किए गए हैं। पटना में पाटलिपुत्र टाउनशिप के लिए 1,010 एकड़, गया में मगध टाउनशिप के लिए 1,629 एकड़ और सोनपुर में हरिहरनाथपुरम के लिए 2,000 एकड़ जमीन का कोर एरिया बताया गया है। दरभंगा में मिथिला टाउनशिप के लिए 1,600 एकड़ और सहरसा में कोसी टाउनशिप के लिए 1,020 एकड़ क्षेत्र प्रस्तावित है।


इसी तरह पूर्णिया में 1,374 एकड़, मुंगेर में 1,016 एकड़, मुजफ्फरपुर में 800 एकड़, छपरा में 2,000 एकड़, भागलपुर में 861 एकड़ और सीतामढ़ी में 532 एकड़ कोर एरिया का उल्लेख किया गया है। इन आंकड़ों को संबंधित योजनाओं के प्रस्तावित क्षेत्र के रूप में देखना चाहिए। जमीन की अंतिम स्थिति और विकास की सीमा के लिए सरकारी अधिसूचनाओं तथा मास्टर प्लान की जानकारी जरूरी है।


बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट पर क्यों उठ रहे सवाल?


किसान संगठनों ने बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट, 2026 के तहत जमीन से जुड़े अधिकारों और प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि भूमि अधिग्रहण, मुआवजे, पुनर्वास और किसानों की सहमति से जुड़े नियम स्पष्ट किए जाएं। संगठनों का कहना है कि किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले यह आकलन होना चाहिए कि उससे कितने परिवार प्रभावित होंगे और उनकी आमदनी, रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा। वे भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के लागू प्रावधानों के पालन की भी मांग कर रहे हैं।


किसानों के मुताबिक, जमीन का मुआवजा मिलने भर से उनकी सभी समस्याएं दूर नहीं होंगी। खेती से होने वाली नियमित कमाई खत्म होने पर परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसलिए जमीन की कीमत तय करने से लेकर पुनर्वास तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।


किसानों की मांग- सैटेलाइट टाउनशिप के साथ स्मार्ट गांव भी बनें


किसान संगठनों का कहना है कि बिहार के विकास का मतलब केवल नए शहर बसाना या बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट तैयार करना नहीं होना चाहिए। गांवों में सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, ग्रामीण उद्योगों और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देना जरूरी है। उनका तर्क है कि उपजाऊ जमीन का इस्तेमाल बदलने से खेती पर निर्भर परिवारों की लंबे समय की आमदनी प्रभावित हो सकती है। इसलिए विकास की योजना बनाते समय किसानों की सहमति, उनकी आजीविका और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।


किसानों ने सरकार के सामने रखीं ये मांगें


किसान संगठनों ने लैंड पूलिंग की प्रक्रिया में किसानों के अधिकार स्पष्ट करने, उचित मुआवजे और पुनर्वास की कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा जमीन की कीमत तय करने के नियम सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके अलावा वे सभी 11 टाउनशिप परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने और प्रभावित परिवारों पर पड़ने वाले सामाजिक व आर्थिक असर का आकलन कराने की मांग कर रहे हैं। संगठनों ने बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट, 2026 की समीक्षा और उसे वापस लेने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि परियोजनाओं से जुड़े फैसलों में किसानों और स्थानीय लोगों की भागीदारी होनी चाहिए।


नवंबर में पटना में किसान मार्च की चेतावनी


किसान संगठनों ने कहा है कि अगर एक महीने के भीतर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो नवंबर में पटना में किसान मार्च निकाला जाएगा। संगठनों के मुताबिक, उनका विरोध केवल जमीन की कीमत तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती, रोजगार और किसान परिवारों के भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा है। अब इस मामले में सरकार की प्रतिक्रिया, संबंधित कानून के प्रावधानों और अदालत में चल रही कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। किसान संगठनों का कहना है कि वे ऐसा विकास चाहते हैं जिसमें शहरों को बेहतर सुविधाएं मिलें, लेकिन किसानों के अधिकार और आजीविका भी सुरक्षित रहें।


क्या है बिहार की सैटेलाइट टाउनशिप योजना?


सैटेलाइट टाउनशिप ऐसी नई शहरी बस्तियां होती हैं जिन्हें बड़े शहरों के आसपास योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाता है। इनका उद्देश्य आवास, सड़क, परिवहन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना होता है। बिहार सरकार की योजना भी इसी तरह नए शहरी क्षेत्र विकसित करने की है।


हालांकि, इन परियोजनाओं के लिए जमीन का इस्तेमाल कैसे होगा, किसानों को क्या विकल्प मिलेंगे और प्रभावित परिवारों को किस तरह का मुआवजा या विकसित जमीन दी जाएगी, इन सवालों का जवाब अंतिम सरकारी योजनाओं और लागू नियमों से स्पष्ट होगा। सरकार की ओर से अप्रैल 2026 में यह भी बताया गया था कि टाउनशिप योजना में जमीन देने वाले किसानों को विकसित रूप में कम से कम 55 प्रतिशत जमीन वापस देने की व्यवस्था प्रस्तावित है।