Bihar Officer Promotion: बिहार में अब आसान नहीं होगा अधिकारियों का प्रमोशन ! नीतीश सरकार का नया नियम, अब इनको नहीं मिलेगी प्रोन्नति
Bihar Officer Promotion: बिहार में अब सरकारी अधिकारियों के प्रमोशन के लिए नीतीश सरकार ने नया नियम लाग कर दिया है। जिसके तहत अब अधिकारियों की प्रोन्नति आसान नहीं होगी। नीतीश सरकार ने प्रोन्नति प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी तय कर दी है।
Bihar Officer Promotion: बिहार में अब सरकारी अधिकारियों को प्रमोशन मिलना आसान नहीं होगा। नीतीश सरकार किसी भी अधिकारी को प्रमोशन देने से पहले उनकी रिकॉर्ड खंगालेगी। अगर अफसर साफ चरित्र के हुए तो ही उन्हें प्रमोशन मिलेगा। साल में 2 बार अफसरों की लिस्ट बनेगी। अफसरों पर सख्त निगरानी की जाएगी। बता दें कि सरकार ने यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकंजा कसने के लिए लिया है। इसके तहत अब अफसरों और कर्मचारियों की प्रोन्नति (प्रमोशन) प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी तय कर दी गई है।
आसान नहीं होगा प्रमोशन
जानकारी अनुसार निगरानी विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज है या जिनके खिलाफ आरोप पत्र समर्पित हो चुका है, उन्हें प्रोन्नति देने से पहले निगरानी स्वच्छता का निर्धारण अनिवार्य रूप से किया जाएगा। निगरानी विभाग के अनुसार, साल में दो बार जनवरी और जुलाई में प्रशासी विभागों को ऐसे अफसर-कर्मचारियों की सूची उपलब्ध कराई जाएगी, जिन पर भ्रष्टाचार से जुड़े मामले दर्ज हैं। इसी क्रम में दिसंबर 2025 तक का पूरा विवरण सभी संबंधित विभागों, प्रमंडलों और जिलों को भेजा गया है।
निगरानी ने जारी किया पत्र
इस संबंध में निगरानी विभाग ने सभी प्रमुख विभागों और जिला कार्यालयों को पत्र जारी किया है। पत्र में बताया गया है कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई और आर्थिक अपराध इकाई द्वारा दर्ज मामलों और समर्पित आरोप पत्रों का विवरण सीडी के माध्यम से संबंधित कार्यालयों को भेजा जा रहा है। इन सूचनाओं के आधार पर प्रोन्नति पंजी को अपडेट करने और उसी अनुरूप निगरानी स्वच्छता का निर्धारण करने का निर्देश दिया गया है।
प्रोन्नति से पहले निगरानी स्वच्छता प्रमाण पत्र जरूरी
निगरानी विभाग ने साफ किया है कि अब फाइलों के आधार पर नहीं, बल्कि पारदर्शी सूची के जरिए यह तय होगा कि कौन अधिकारी या कर्मचारी स्वच्छ है और प्रोन्नति के योग्य है। साथ ही भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का रिकॉर्ड जिला स्तर पर भी सुरक्षित रखा जाएगा। हालांकि निगरानी विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 30 जून 2026 तक जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की प्रोन्नति होनी है, उनके लिए अलग से निगरानी स्वच्छता प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जांच के दायरे में आए कर्मियों को राहत मिल जाएगी। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो संबंधित प्रमंडल या जिला प्रशासन को उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
जिला स्तर पर सुरक्षित रहेगा रिकॉर्ड, वेबसाइट पर भी होगी सूची
निगरानी विभाग ने बताया है कि किसी भी पदाधिकारी या कर्मी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने पर उसकी छायाप्रति सहित सूचना संबंधित प्रमंडल और जिले को भेजी जाती है। इसी आधार पर जिला स्तर पर भ्रष्ट अफसर-कर्मियों का रिकॉर्ड सुरक्षित किया जाएगा, ताकि प्रोन्नति से पहले वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। इसके अलावा संदिग्ध और आरोपित अधिकारियों-कर्मचारियों की सूची निगरानी विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगी।
इसके बिना नहीं मिलेगी प्रोन्नति
विभागों को निर्देश दिया गया है कि सूची का अवलोकन किए बिना किसी भी कर्मचारी या पदाधिकारी को प्रोन्नति न दी जाए। प्रोन्नति के अलावा अन्य मामलों में यदि निगरानी स्वच्छता की आवश्यकता होती है, तो नियमानुसार निगरानी विभाग से अनुरोध किया जा सकता है। इस सख्त व्यवस्था के जरिए सरकार ने साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है। अब पारदर्शी सूची और निगरानी के आधार पर ही तय होगा कि कौन अधिकारी प्रोन्नति के योग्य है।