Bihar Congress: दिल्ली दरबार में बिहार कांग्रेस का हिसाब-किताब, राजेश राम की कुर्सी पर संकट के बादल, आरजेडी के साथ टूटेगा गठबंधन! नहीं हो सका विधायक दल के नेता का चयन

Bihar Congress:राहुल गांधी के साथ हुई बैठक में बिहार के कई नेताओं ने खुलकर प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए, जिसके बाद प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की कुर्सी हिलती नजर आने लगी है।

Bihar Congress Churn in Delhi Rajesh Ram s Chair Under Cloud
राजेश राम की कुर्सी पर संकट के बादल- फोटो : social Media

Bihar Congress: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद प्रदेश कांग्रेस में मची सियासी उथल-पुथल अब दिल्ली दरबार तक पहुंच चुकी है। पार्टी के भीतर गुटबाज़ी, आरोप-प्रत्यारोप और नेतृत्व परिवर्तन की मांग ने आलाकमान को हरकत में ला दिया है। शुक्रवार को नई दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में बिहार कांग्रेस के विधायकों, एमएलसी, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक हुई। इस बैठक में कई नेताओं ने खुलकर प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए, जिसके बाद प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की कुर्सी हिलती नज़र आने लगी है।

सूत्रों के मुताबिक, आलाकमान अब बिहार कांग्रेस में जारी घमासान को थामने के लिए बड़ा सियासी दांव खेलने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के लिए एक सर्च कमिटी गठित की जाएगी। यह कमिटी संगठन की नब्ज़ टटोलकर रिपोर्ट देगी और उसके आधार पर जून 2026 के बाद कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा। बैठक के बाद बिहार से आए नेताओं के बयानों से साफ है कि राजेश राम की भूमिका को लेकर असंतोष गहराया हुआ है।

बैठक में एक वरिष्ठ नेता ने प्रदेश नेतृत्व के रवैये पर नाराजगी जताई। सूत्र बताते हैं कि तारिक अनवर ने साफ कहा कि संगठन की कमान ऐसे व्यक्ति को मिलनी चाहिए, जिसमें अनुभव और काबिलियत हो, न कि सिर्फ़ जातीय समीकरण के आधार पर नियुक्ति की जाए। एक एमएलसी ने तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मशहूर नारे “जात पर न पात पर, मुहर लगेगी हाथ पर”की याद दिलाते हुए पार्टी को उसी रास्ते पर लौटने की नसीहत दी।

दरअसल, बिहार कांग्रेस में एक गुट लंबे समय से राजेश राम और प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। चुनाव से पहले टिकट बंटवारे में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे और जब नतीजे आए तो हार ने आग में घी डाल दिया। पटना से लेकर दिल्ली तक धरना-प्रदर्शन हुए और नेतृत्व बदलने की मांग तेज हो गई।

बैठक में बिहार के सभी 6 कांग्रेस विधायक, एमएलसी और सांसद मौजूद थे। राहुल गांधी और खड़गे ने विधायकों से उनकी नाराजगी पर सवाल किया, लेकिन सभी ने एक सुर में कहा कि कोई नाराजगी नहीं है। यह बयान एनडीए नेताओं के उन दावों की काट माना जा रहा है, जिनमें कांग्रेस विधायकों के पाला बदलने की बातें कही जा रही थीं।

दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। वाल्मीकि नगर से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद ने ऐसा बयान दे दिया है, जिसने महागठबंधन की अंदरूनी दरार को बेपर्दा कर दिया है। सुरेंद्र प्रसाद ने दो टूक कहा कि अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ गठबंधन कर आगे चलना संभव नहीं है। यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब बिहार में सियासी खेमेबंदी अपने चरम पर है।कांग्रेस विधायक ने साफ लहजे में कहा कि आने वाले चुनाव में कांग्रेस अपने बलबूते मैदान में उतरेगी। गठबंधन की बैसाखी छोड़कर पार्टी खुद की ताकत आजमाएगी। उन्होंने दावा किया कि इस रणनीति पर राहुल गांधी की भी सहमति बन चुकी है। यानी कांग्रेस अब बैकफुट नहीं, बल्कि फ्रंटफुट पर खेलने की तैयारी में है।

विधायकों के टूटने और दल-बदल की अटकलों पर भी सुरेंद्र प्रसाद ने सख्त तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को सभी विधायकों ने भरोसा दिलाया है कि वे कहीं नहीं जाएंगे। उनका कहना था कि “NDA की सुनामी” में भी कांग्रेस के विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं, इसलिए डरने या भागने का सवाल ही नहीं उठता। यह बयान सीधे-सीधे उन चर्चाओं पर लगाम लगाने की कोशिश माना जा रहा है, जिनमें कांग्रेस विधायकों के पाला बदलने की बातें हो रही थीं।कांग्रेस विधायक दल के नेता के चयन को लेकर भी बड़ा संकेत दिया गया है। सुरेंद्र प्रसाद ने कहा कि बजट सत्र से पहले ही कांग्रेस विधायक दल का नेता चुन लिया जाएगा। इससे यह साफ है कि पार्टी अब संगठन और नेतृत्व दोनों मोर्चों पर जल्द फैसला लेने के मूड में है।सिर्फ विधायक दल ही नहीं, बल्कि बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पुनर्गठन को लेकर भी बड़ा दावा किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी का चयन भी बहुत जल्द किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह पूरी कवायद कांग्रेस को बिहार में नए सिरे से खड़ा करने की रणनीति का हिस्सा है।

बैठक में विधायक दल के नेता का चयन नहीं हो पाया। आलाकमान ने यह फैसला विधायकों पर छोड़ दिया है। वहीं, कई नेताओं ने आरजेडी के साथ गठबंधन पर भी असहजता जाहिर की... कुल मिलाकर, यह बैठक बिहार कांग्रेस में लंबे समय से चल रही खींचतान को खत्म करने की कोशिश तो है, लेकिन सियासी सवाल अब भी ज़िंदा हैं क्या नेतृत्व बदलेगा, या पार्टी एक और चुनावी इम्तिहान तक इसी उधेड़बुन में फंसी रहेगी?