भ्रष्टाचार पर बिहार सरकार का कड़ा हंटर: करोड़ों की अवैध संपत्ति वाले इस बड़े अधिकारी का डिमोशन, दो साल तक वेतन में कटौती
बिहार में ₹1.35 करोड़ की अवैध संपत्ति अर्जित करने वाले परिवहन अधिकारी पर विभाग ने कड़ा फैसला लिया है। विभागीय जांच में दोष सिद्ध होने के बाद 2 साल के लिए वेतनमान में कटौती और डिमोशन का आदेश जारी।
Patna : बिहार सरकार के परिवहन विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी नजीर पेश करते हुए 'आय से अधिक संपत्ति' मामले में फंसे एक प्रवर्तन अवर निरीक्षक (ESI) पर बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने संबंधित अधिकारी के स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए उन्हें अगले दो वर्षों के लिए डिमोशन (वेतनमान में अवनति) की सजा सुनाई है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दर्ज आपराधिक मामले और विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि के बाद की गई है।
सांसद की शिकायत पर शुरू हुई थी कार्रवाई
यह मामला भागलपुर के माननीय सांसद द्वारा विभाग को सौंपे गए एक परिवाद पत्र से जुड़ा है। सांसद की शिकायत के आधार पर जिला पदाधिकारी, भागलपुर से जांच कराई गई थी। 30 अगस्त 2022 को प्राप्त जांच प्रतिवेदन में अधिकारी के विरुद्ध लगे आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके बाद विभाग ने बिहार सरकारी सेवक नियमावली के तहत विभागीय कार्यवाही (Departmental Proceedings) चलाने का आदेश दिया था।
करोड़ से अधिक की प्रत्यानुपातिक धनार्जन का मामला
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई जांच में अधिकारी के पास आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति पाई गई थी। ब्यूरो के अनुसार, अधिकारी के विरुद्ध $1,35,94,585/-$ (एक करोड़ पैंतीस लाख चौरानवे हजार पांच सौ पचासी रुपये) के प्रत्यानुपातिक धनार्जन का आरोप है। इस गंभीर भ्रष्टाचार के मामले में निगरानी थाना कांड संख्या-19/2023 के तहत भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं में प्राथमिकी भी दर्ज है।
तीन गंभीर आरोप विभागीय जांच में प्रमाणित
संयुक्त आयुक्त-सह-सचिव, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार, भागलपुर की अध्यक्षता में चली संचालन प्रक्रिया के बाद 19 मार्च 2025 को अंतिम रिपोर्ट सौंपी गई। जांच अधिकारी ने आरोपी अधिकारी के विरुद्ध लगे कुल चार आरोपों में से तीन आरोपों (आरोप संख्या 1, 2 और 3) को पूर्णतः प्रमाणित पाया। हालांकि चौथे आरोप पर निगरानी ब्यूरो का अनुसंधान अब भी प्रक्रिया के अधीन है। विभाग ने जांच रिपोर्ट की प्रति अधिकारी को उपलब्ध कराई थी, लेकिन उनके द्वारा दिया गया लिखित अभिकथन अनुशासनिक प्राधिकार को संतुष्ट नहीं कर सका।
दो वर्षों के लिए डिमोशन की सजा
परिवहन विभाग के अनुशासनिक प्राधिकार ने गहन समीक्षा के बाद दोषी अधिकारी के स्पष्टीकरण को अस्वीकार कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14 के अंतर्गत उन्हें दंडित किया गया है। अधिकारी को अगले दो वर्षों के लिए 'असंचयात्मक प्रभाव' (Non-cumulative effect) से उनके वेतनमान के निम्नतम प्रक्रम पर अवनत कर दिया गया है। यह आदेश 8 अप्रैल 2026 को जारी किया गया।