बिहार परिवहन विभाग में 'पासवर्ड घोटाला'! सरकारी बाबू देखते रह गए और संविदा कर्मी कर गए करोड़ों का खेला!

Bihar Transport Department Scam: बिना NOC गाड़ी पास, DL में फर्जी नाम-पता... बिहार परिवहन विभाग का वो 'पासवर्ड कांड' जिसने सबको चौंकाया,जानिए कैसे हुआ यह पासवर्ड घोटाला।

बिहार परिवहन विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा- फोटो : news 4 nation AI

बिहार के परिवहन विभाग में डिजिटलीकरण की आड़ में एक बेहद गंभीर 'पासवर्ड घोटाला' सामने आया है। हमारे इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों में तैनात स्थायी सरकारी लिपिकों (Clerks) को दरकिनार कर सारा नियंत्रण संविदा कर्मियों के हाथों में सौंप दिया गया है, जिससे भ्रष्टाचार का एक बड़ा खेल शुरू हो गया है।


संविदा कर्मियों के हाथों में सिस्टम, सरकारी लिपिक बने मूकदर्शक

इस पूरे घोटाले की मुख्य जड़ परिवहन विभाग के 'वाहन' और 'सारथी' पोर्टल की यूजर ID और पासवर्ड का गलत हाथों में होना है। कार्यालयों में तैनात कंप्यूटर-दक्ष सरकारी लिपिकों को इस सिस्टम की ID-पासवर्ड नहीं दिए गए हैं। इसके उलट, सारा नियंत्रण बेल्ट्रॉन के संविदा कर्मियों (डाटा एंट्री ऑपरेटर और प्रोग्रामर) को सौंप दिया गया है। निगरानी और क्रॉस-वेरिफिकेशन की कोई व्यवस्था न होने के कारण ये संविदा कर्मी अपनी मर्जी से सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं और स्थायी लिपिक विभाग में सिर्फ 'दर्शक' बनकर बैठने को मजबूर हैं।

तीन जिलों में उजागर हुआ करोड़ों का खेल और फर्जीवाड़ा

सिस्टम के इस बेलगाम कंट्रोल के कारण नवादा, दरभंगा और रोहतास जिलों में तीन बड़े कांड सामने आए हैं। नवादा में डाटा एंट्री ऑपरेटर ने बिना किसी NOC के ही गाड़ियों का हाइपोथिकेशन (Hypothecation Termination) खत्म कर दिया। दरभंगा में ऑपरेटर और प्रोग्रामर ने मिलकर बिना किसी वैध साक्ष्य के ड्राइविंग लाइसेंस (DL) में अवैध रूप से नाम और पते बदल डाले। वहीं, सबसे बड़ा झटका रोहतास में लगा, जहाँ ऑडिट के दौरान ऑपरेटर और प्रोग्रामर द्वारा मिलकर किए गए लगभग 2.5 करोड़ रुपये के भारी-भरकम वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इसक विवरण निम्न है 


वर्ष 2023 से बंद हुई वेरिफिकेशन व्यवस्था ने बढ़ाई मुश्किलें

विभाग में इस तरह की धांधली पहले इतनी आसान नहीं थी। वर्ष 2023 तक यह नियम था कि ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) प्रिंट होने के बाद संबंधित सरकारी लिपिक उसका दोबारा सत्यापन (Verfication) करते थे। इस दोहरे नियंत्रण से गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती थी। लेकिन साल 2023 में इस वेरिफिकेशन व्यवस्था को अचानक समाप्त कर दिया गया। जब राजस्व लेखा, निबंधन और परमिट की अंतिम जिम्मेदारी लिपिकों की है, तो सुरक्षा के इस सबसे महत्वपूर्ण चक्र को हटाकर पासवर्ड संविदा कर्मियों के हवाले करने पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

लिपिकों की गोलबंदी और राज्य परिवहन आयुक्त से ID देने की मांग

इस फर्जीवाड़े से परेशान होकर पटना डीटीओ (DTO) कार्यालय के लिपिकों—संजू कुमार, रणवीर नंदन, बिंदु पांडेय, धर्मेन्द्र कुमार, करिश्मा कुमारी और अविनाश कुमार ने एकजुट होकर राज्य परिवहन आयुक्त को एक सामूहिक पत्र लिखा है। लिपिकों ने मांग की है कि उन्हें तुरंत 'वाहन' और 'सारथी' पोर्टल की यूजर ID जारी की जाए ताकि वे काम पर नजर रख सकें। वर्ष 2015 में भी बेतिया में 67 लाख रुपये का गबन हुआ था, लेकिन विभाग ने उससे कोई सबक नहीं लिया। अब गेंद राज्य परिवहन आयुक्त के पाले में है; अगर लिपिकों को अधिकार नहीं मिले, तो रोहतास जैसा 2.5 करोड़ का खेल बिहार के हर जिले में दोहराया जा सकता है।

रिपोर्ट - धीरज पराशर (विशेष संवाददाता)