बिहार परिवहन विभाग का बड़ा फैसला: 30 हजार से अधिक लंबित भुगतान मामलों का हुआ समाधान
बिहार परिवहन विभाग ने वित्त विभाग और NIC के सहयोग से 30 हजार से अधिक लंबित ऑनलाइन भुगतान मामलों की तकनीकी बाधा दूर कर ली है। इससे वाहन निबंधन, डीएल, ई-चालान और परमिट जैसी सेवाओं को गति मिलेगी।
बिहार में वाहन निबंधन, ई-चालान और ड्राइविंग लाइसेंस सहित विभिन्न परिवहन सेवाओं के लिए ऑनलाइन भुगतान अटकने की परेशानी को दूर कर लिया गया है। परिवहन विभाग ने 30 हजार से अधिक लंबित भुगतान मामलों की तकनीकी बाधा का गुरुवार को सफलतापूर्वक समाधान कर दिया। इस निर्णय से राज्य के हजारों वाहन मालिकों, लाइसेंस आवेदकों और वाहन डीलरों को बड़ी राहत मिली है, जिससे ई-चालान, फिटनेस, परमिट, प्रदूषण और इंश्योरेंस जैसी सेवाओं के रुके हुए कार्यों को गति मिलेगी।
ओग्रास-1 से ओग्रास-2 में बदलाव के दौरान आई थी तकनीकी समस्या
परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाओं में वित्तीय लेनदेन के लिए ओग्रास-1 को बंद कर नए ओग्रास-2 (रेवेन्यू मैनेजमेंट सिस्टम) को लाइव किए जाने के दौरान यह समस्या उत्पन्न हुई थी। इस बदलाव के कारण कई ट्रांजेक्शन के स्टेटस सिस्टम में अपडेट नहीं हो पा रहे थे। इसके चलते नागरिकों द्वारा भुगतान किए जाने के बावजूद सिस्टम में ट्रांजेक्शन लंबित दिखाई दे रहे थे और वाहन या लाइसेंस से संबंधित आगे की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी हुई थी।
वित्त विभाग और एनआईसी के सहयोग से तैयार हुआ तकनीकी समाधान
इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए परिवहन विभाग ने वित्त विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के साथ मिलकर तकनीकी स्तर पर काम किया। इसके तहत 'वाहन', 'सारथी' और 'ओग्रास' प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक विशेष एपीआई (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) विकसित किया गया। एपीआई आधारित इस व्यवस्था को लागू करते ही 30 हजार से अधिक अटके हुए भुगतानों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया।
परिवहन सचिव ने कहा: आम लोगों के लिए बड़ी राहत
परिवहन सचिव श्री राज कुमार ने बताया कि विभाग की सेवाएं सीधे आम जनता से जुड़ी हैं, इसलिए भुगतान के बाद काम रुकने से नागरिकों को होने वाली परेशानी को गंभीरता से लिया गया। उन्होंने कहा कि विभाग का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नागरिक का पैसा जमा होने के बाद उसका काम अकारण न लटके। इस तकनीकी समाधान से आम नागरिकों और वाहन डीलरों को अनावश्यक मानसिक व व्यावहारिक परेशानी से मुक्ति मिली है।
ऑनलाइन परिवहन सेवाओं को अधिक सुगम बनाने की पहल
राज्य परिवहन आयुक्त श्री आरिफ अहसन ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि विभाग नागरिकों को अधिक से अधिक ऑनलाइन और फेसलेस (दफ्तर जाए बिना) सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। 'ओग्रास', 'वाहन' और 'सारथी' के बीच विकसित यह एपीआई समाधान ऑनलाइन सेवाओं को अधिक पारदर्शी, पारस्परिक और सुचारू बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
जनता और वाहन डीलरों को मिलने वाले प्रमुख लाभ
लंबित भुगतान मामलों के निपटारे से आम लोगों को कई स्तरों पर सीधा फायदा मिलेगा:
वाहन निबंधन, फिटनेस, परमिट और प्रदूषण प्रमाण-पत्र (PUC) से जुड़ी प्रक्रियाएं अब बिना रुकावट आगे बढ़ सकेंगी।
ड्राइविंग लाइसेंस (DL), लर्निंग लाइसेंस (LL) और ई-चालान भुगतान के बाद की प्रक्रियाएं त्वरित गति से पूरी होंगी।
वाहन डीलरों को ग्राहकों के वाहनों के ऑनलाइन निष्पादन में आ रही वित्तीय अड़चनों से मुक्ति मिलेगी।
नागरिकों को भुगतान के स्टेटस के सत्यापन के लिए सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पटना से धीरज पराशर की रिपोर्ट