सिस्टम का खेल: भ्रष्टाचार के आरोपी इंस्पेक्टर पर विभाग मेहरबान, जेल से बाहर आते ही 'पुरस्कार' में मिली बहाली
भ्रष्टाचार और गंभीर धाराओं में जेल की हवा खा चुके प्रवर्तन अवर निरीक्षक हरि शंकर कुमार को बिहार परिवहन विभाग ने बहाल कर दिया है। जेल से रिहा होते ही विभाग ने यह मेहरबानी दिखाई है ।
Patna - बिहार के परिवहन विभाग में सिस्टम की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम जैसी गंभीर धाराओं के तहत जेल जा चुके प्रवर्तन अवर निरीक्षक (ESI) श्री हरि शंकर कुमार को फिर से सेवा में बहाल कर दिया है । मोतिहारी में तैनाती के दौरान गिरफ्तारी झेलने वाले इस अधिकारी पर विभाग की यह त्वरित मेहरबानी चर्चा का विषय बनी हुई है ।
मोतिहारी में भ्रष्टाचार और गिरफ्तारी का पूरा मामला
यह विवाद तब शुरू हुआ जब मोतिहारी के पिपरा कोठी थाना में प्राथमिकी संख्या 425/25 दर्ज की गई । हरि शंकर कुमार पर भ्रष्टाचार निवारण (संशोधित) अधिनियम-2018 की धारा 7(a)/7A के साथ-साथ बीएनएस की गंभीर धाराओं (308(2)/61(2)A) के तहत मामला दर्ज हुआ था । इस मामले में 14 दिसंबर 2025 को उन्हें रंगे हाथों या साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया गया था ।
निलंबन की खानापूर्ति और फिर वापसी
गिरफ्तारी के बाद जिला परिवहन पदाधिकारी, मोतिहारी की रिपोर्ट पर विभाग ने उन्हें 14.12.2025 के प्रभाव से निलंबित तो किया, लेकिन यह कार्रवाई महज एक औपचारिक खानापूर्ति साबित हुई । जैसे ही कुमार 20 फरवरी 2026 को जमानत पर रिहा हुए, उन्होंने बिना समय गंवाए 23 फरवरी को मुख्यालय में अपना योगदान दे दिया । विभाग ने भी तत्परता दिखाते हुए उनकी इस वापसी को तुरंत स्वीकार कर लिया ।
नियमों की आड़ में आरोपी अधिकारी को राहत
विभाग ने अपने आदेश में बिहार सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के नियम-9(3)(i) का हवाला देते हुए हरि शंकर कुमार को उनके योगदान की तिथि (23.02.2026) से ही निलंबन मुक्त कर दिया है । सवाल यह उठता है कि जिस अधिकारी पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगे हैं, उसे इतनी जल्दी सेवा में वापस लेकर विभाग समाज को क्या संदेश देना चाहता है? क्या ऐसे फैसलों से भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति कमजोर नहीं हो रही?
सक्षम प्राधिकार की मंजूरी पर भी उठे सवाल
आश्चर्य की बात यह है कि इस विवादित प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार ने भी अपनी मंजूरी दे दी है । अपर सचिव, परिवहन विभाग के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विभाग को अधिकारी पर लगे आरोपों से अधिक चिंता उनकी सेवा बहाली की थी । फिलहाल इस आदेश की प्रतियां मुजफ्फरपुर के प्रमण्डलीय आयुक्त और मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक को भी भेज दी गई हैं