बिहार विधान परिषद् में साइबर सुरक्षा की 'पाठशाला': डीपफेक और AI के खतरों से बचने के लिए पार्षदों को मिली ट्रेनिंग

विधान परिषद् के सदस्यों के लिए दो दिवसीय साइबर सुरक्षा और AI जागरूकता कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। विशेषज्ञों ने लाइव डेमो के जरिए डीपफेक और फिशिंग जैसे डिजिटल खतरों से बचने के गुर सिखाए और जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष सुरक्षा मैनुअल भी जारी किया।

Patna - बिहार विधान परिषद् में आज डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण "साइबर सुरक्षा एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जागरूकता कार्यशाला" का आयोजन किया गया। परिषद् के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य माननीय जनप्रतिनिधियों को साइबर अपराधों, डीपफेक तकनीक और डिजिटल खतरों के प्रति सचेत करना है, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की शुचिता और व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखा जा सके।

सदन के सदस्यों  के लिए बना साइबर सुरक्षा मैनुअल 

कार्यशाला के दौरान एक विशेष 'साइबर सुरक्षा मैनुअल' का विमोचन किया गया, जिसे विशेष रूप से विधान परिषद् और विधानसभा के सदस्यों के लिए तैयार किया गया है। उद्घाटन सत्र में सभापति के साथ उपसभापति प्रो. (डॉ.) रामबचन राय, 'द एशिया फाउंडेशन' की इंडिया हेड नंदिता बरुआह, जन जागरण संस्थान के प्रमुख वाई.के. गौतम और तकनीकी विशेषज्ञ शुभम पारेख (DeepCytes) मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय व्यक्तियों के लिए डिजिटल साक्षरता अब एक अनिवार्य सुरक्षा कवच है।

एआई के खतरे से कराया अवगत

इस कार्यशाला का सबसे मुख्य आकर्षण लाइव साइबर ड्रिल और डेमोंस्ट्रेशन रहा। तकनीकी विशेषज्ञों ने लाइव डेमो के जरिए यह दिखाया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का उपयोग कर किसी व्यक्ति की आवाज या चेहरे का क्लोन बनाकर दुरुपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, रियल-टाइम साइबर रिस्क असेसमेंट के माध्यम से सदस्यों को डिजिटल सिस्टम की कमजोरियों और फिशिंग अटैक (संदिग्ध लिंक और ईमेल) को पहचानने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए।

एआई पर प्रभावी निति की जरुरत

चर्चा के दौरान बिहार में युवाओं के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करने और AI से संबंधित प्रभावी नीतियां बनाने पर भी विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने आगाह किया कि जनप्रतिनिधि अक्सर साइबर हमलों के प्राथमिक लक्ष्य होते हैं, इसलिए उन्हें अपने पासवर्ड और सोशल मीडिया खातों की सुरक्षा के प्रति अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का संचालन एशिया फाउंडेशन की प्रतिनिधि ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आदित्य गौतम ने दिया।

दो दिवसीय इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का समापन कल, 11 मार्च 2026 को होगा। पहले दिन के सत्रों के बाद यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि 'मजबूत लोकतंत्र के लिए सुरक्षित डिजिटल व्यवहार' उतना ही जरूरी है जितना कि सुरक्षित मतपेटी। यह पहल बिहार को डिजिटल गवर्नेंस और सुरक्षा के मामले में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

रिपोर्ट - वंदना शर्मा