Patna High Court: अस्पतालों का खतरनाक कचरा कांड पहुँचा हाईकोर्ट, बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण पर उच्च न्यायालय का सख्त रुख, जिलों से मांगा गया जवाब
Patna High Court:पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी व निजी अस्पतालों के बायो मेडिकल वेस्टको सही ढंग से निस्तारित नहीं करने के मामलें पर सुनवाई की।...
Patna High Court:पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी व निजी अस्पतालों के बायो मेडिकल वेस्ट ( अस्पतालों के कचरे) को सही ढंग से निस्तारित ( नष्ट करने या हटाने) नहीं करने के मामलें पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर सुनवाई की।इस मामलें पर अगली सुनवाई ग्रीष्मावकाश के बाद होने की संभावना हैं।
कोर्ट में समस्तीपुर व किशनगंज जिले से हलफ़नामा दायर किया गया है।बाकी अन्य जिलों से हलफ़नामा शीघ्र दायर किया जायेगा। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी इस सम्बन्ध में हलफ़नामा दायर किया है।उन्होंने बताया कि 15 मई ,2026 को सम्बन्धित पक्षों की बैठक बुलाई गयी है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से बायो मेडिकल वेस्ट के सम्बन्ध में की गयी कार्रवाईयों का रिपोर्ट तलब किया था।साथ ही राज्य सरकार को भी ये बताने को कहा गया है कि राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में कचरे के निस्तारण के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है।राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि सरकारी व निजी अस्पतालों से कचरा व कूड़ा हटाने व नष्ट करने की कार्रवाई की जा रही।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जानना चाहा था कि अस्पतालों के कचरे को सही ढंग ने नष्ट नहीं करने पर कितने अस्पतालों को नोटिस दी गयी।उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गयी है,इसका पूरा ब्यौरा अगली सुनवाई में प्रस्तुत करें।
याचिकाकर्ता विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा ने कोर्ट को बताया है कि राज्य में बहुत सारे छोटे बड़े सरकारी और निजी अस्पताल है।अस्पतालों में जो गंदगी और कचरे को सही ढंग से नष्ट नही किया या हटाया नहीं जाता है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि अधिकतर अस्पताल मेडिकल बायो वेस्ट का निस्तारण मनमाने ढंग से करते है।इससे न सिर्फ,गन्दगी, बातावरण और वायु प्रदूषित होता है,बल्कि इन अस्पतालों के आस पास रहने वालों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस मामलें पर अगली सुनवाई ग्रीष्मावकाश के बाद होगी।