Bihar News : डुमरांव में बिस्मिल्लाह खां संगीत महाविद्यालय को 87 करोड़ की मिली मंजूरी, मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

Bihar News : नीतीश कैबिनेट ने डुमरांव में बिस्मिल्लाह खां संगीत महाविद्यालय के लिए 87 करोड़ रूपये के बजट का प्रावधान किया. लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने इसके लिए सीएम का आभार जताया है......पढ़िए आगे

मुरली ने जताया आभार - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : विश्वविख्यात शहनाई वादक भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की यादों को सहेजने की दिशा में बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। डुमरांव में प्रस्तावित 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खां संगीत महाविद्यालय' के लिए राज्य कैबिनेट ने 87,81,43,400 रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की है। इस फैसले के बाद बक्सर जिले सहित पूरे बिहार के कला और संगीत प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के जीवन पर पिछले 35 वर्षों से शोध कर रहे प्रसिद्ध लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई देते हुए कहा कि यह फैसला न केवल उस्ताद की विरासत को सच्चा सम्मान देने वाला है, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।

मुरली मनोहर श्रीवास्तव, जो इसी वर्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों पर "विकास पुरुष" नामक पुस्तक लिख चुके हैं, ने कहा कि डुमरांव उस्ताद की जन्मभूमि है। वहां संगीत महाविद्यालय खुलने से स्थानीय कलाकारों और विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। यह संस्थान आने वाली पीढ़ियों के लिए संगीत के अध्ययन और प्रशिक्षण का एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का सशक्त केंद्र बनेगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह निर्णय बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और संगीत की परंपरा को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाएगा। श्रीवास्तव के अनुसार, लंबे समय से इस तरह के संस्थान की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, और कैबिनेट की यह मंजूरी बिहार की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।

संगीत प्रेमियों का मानना है कि इस महाविद्यालय के निर्माण से डुमरांव में पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह संस्थान न केवल संगीत शिक्षा का केंद्र होगा, बल्कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की गंगा-जमुनी तहजीब को भी जिंदा रखेगा। सरकार के इस फैसले को संगीत जगत में एक 'मील का पत्थर' माना जा रहा है।