BJP का JDU पर फिर सर्जिकल स्ट्राइक, 11 विधायक तोड़े, MLC चुनाव में भी लगा झटका !

भाजपा और जदयू भले ही NDA में साथ हों और बिहार में गठबंधन की सरकार चला रहे हैं लेकिन जदयू को समय समय पर भाजपा से ऐसा झटका लगता रहा है जिससे पार्टी के अस्तित्व पर ही संकट आन पड़ा है

BJP-JDU Rift - फोटो : news4nation

JDU :  बिहार की राजनीति में भाजपा और जदयू भले ही सहयोगी दल हों, लेकिन दूसरे राज्यों में जदयू के राजनीतिक आधार पर भाजपा के बढ़ते प्रभाव का इतिहास पुराना है। कई बार ऐसा हुआ जब जदयू के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे विधायक भाजपा में शामिल हो गए और देखते ही देखते जदयू का राजनीतिक अस्तित्व ही संकट में पड़ गया। अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। अब बिहार में विधान परिषद चुनाव के बाद दो निर्दलीय नवनिर्वाचित MLC के भाजपा में शामिल होने की खबरों ने एक बार फिर पुराने राजनीतिक घटनाक्रम चर्चा में हैं।


2015 में बिहार से हुई थी शुरुआत

भाजपा और जदयू के बीच राजनीतिक खींचतान का एक बड़ा उदाहरण अगस्त 2015 में देखने को मिला था। उस समय नीतीश कुमार और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव चल रहा था। 19 अगस्त 2015 को जदयू के चार बागी विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, राजेश्वर राज, दिनेश कुशवाहा और सुरेश चंचल भाजपा में शामिल हो गए थे। इन विधायकों को जदयू पहले ही निलंबित कर चुका था।


2020 में अरुणाचल प्रदेश में जदयू को लगा सबसे बड़ा झटका

जदयू के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका दिसंबर 2020 में अरुणाचल प्रदेश में लगा। 2019 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने सात सीटें जीती थीं और भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। लेकिन 25 दिसंबर 2020 को उसके छह विधायक भाजपा में शामिल हो गए। इनमें तलेम तबोह, हायेंग मंगफी, जिक्के ताको, दोरजी वांगडी खारमा, डोंगरू सियोंगजू और कांगगोंग ताकू शामिल थे। इसके बाद जदयू के पास केवल एक विधायक बचा था।


2022 में बचा हुआ आखिरी विधायक भी भाजपा में चला गया

अगस्त 2022 में जदयू के इकलौते विधायक तेची कासो ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश विधानसभा में जदयू का खाता पूरी तरह बंद हो गया। भाजपा की संख्या 49 पहुंच गई।


मणिपुर में भी पांच विधायकों ने छोड़ा जदयू का साथ

सितंबर 2022 में मणिपुर में भी ऐसा ही घटनाक्रम सामने आया। विधानसभा चुनाव में जदयू ने छह सीटें जीती थीं, लेकिन 2 सितंबर 2022 को उसके पांच विधायक खुमुकचम जॉयकिशन सिंह, नगुरसंग्लुर सानाते, मोहम्मद असाब उद्दीन, थांगजाम अरुणकुमार और एलएम खाउते भाजपा में शामिल हो गए। विधानसभा अध्यक्ष ने उनके विलय को स्वीकार कर लिया। जदयू के पास केवल एक विधायक बचा। खास बात यह थी कि बिहार में 9 अगस्त 2022 को नीतीश कुमार ने भाजपा से गठबंधन तोड़कर महागठबंधन की सरकार बनाई थी। इसके कुछ ही सप्ताह बाद मणिपुर में जदयू के पांच विधायक भाजपा में चले गए।


अब बिहार में दो MLC के जरिए नया सियासी घटनाक्रम

ताजा मामला बिहार विधान परिषद चुनाव का है। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय जीते राहुल राज ने जदयू के आनंद पुष्कर को 1815 मतों से हराया। वहीं तिरहुत स्नातक सीट से बंशीधर ब्रजवासी ने जदयू के अभिषेक झा को 9147 मतों से पराजित किया। 31 अक्टूबर 2026 को दोनों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। राहुल राज पहले भाजपा से जुड़े थे और टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़े थे। वहीं बंशीधर ब्रजवासी शिक्षक आंदोलन से निकले निर्दलीय नेता हैं। दोनों ने जदयू प्रत्याशियों को हराया लेकिन अब उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चा है।