B.N.College : स्वाधीनता संग्राम का साक्षी और प्रतिभाओं की खान, 137 वर्षों की स्वर्णिम विरासत समेटे है बीएन कॉलेज
B.N.College : पटना स्थित बीएन कॉलेज की स्थापना के 137 साल पूरे हो चुके हैं. इस दौरान इस कॉलेज ने कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं......पढ़िए आगे
PATNA : वर्ष 1889 में भोजपुर जिले के कुल्हड़िया राज के दो राष्ट्रवादी शिक्षाविदों—बाबू बिशेश्वर सिंह और शालिग्राम सिंह द्वारा स्थापित बिहार नेशनल कॉलेज (बीएन कॉलेज) स्वाधीनता आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा है। 1885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना के बाद छात्रों में राष्ट्रीय चेतना जगाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस कॉलेज का नाम 'नेशनल' हटाने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने संस्थापकों पर भारी दबाव बनाया। अंग्रेजों द्वारा 'राजा' की उपाधि और बड़ी जागीर के प्रस्ताव को ठुकराने पर बिशेश्वर सिंह को कलकत्ता कॉलेज ऑफ लॉ से निष्कासित कर दिया गया तथा वकालत के दौरान बार एसोसिएशन में बैठने से रोक दिया गया। बाद में शालिग्राम सिंह के पुत्र शशि शेखर सिंह 1942 के आंदोलन में शहीद हुए, जबकि 1942 के पटना सचिवालय गोलीकांड के महान शहीद जगपति कुमार भी इसी कॉलेज के मेधावी छात्र थे।
कलकत्ता विश्वविद्यालय से लेकर यूजीसी तक: गौरवशाली शैक्षणिक यात्रा
स्थापना के बाद 1892 में कलकत्ता विश्वविद्यालय ने बीएन कॉलेज को 'फर्स्ट लेवल कॉलेज' का दर्जा दिया। वर्ष 1923 में तत्कालीन कमिश्नर अकडेल अर्ल के प्रयासों से इसे सरकारी नियंत्रण में लेकर 'पूर्ण घाटा अनुदान कॉलेज' घोषित किया गया। 1952 में यह पटना विश्वविद्यालय की घटक इकाई बना और इसे यूजीसी अधिनियम की धारा 12(B) के तहत स्थायी संबद्धता प्राप्त हुई। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बल पर कॉलेज को वर्ष 2003 में यूजीसी एनएएसी (NAAC) द्वारा B++ ग्रेड तथा 7 दिसंबर 2011 को यूजीसी द्वारा 'कॉलेज विद पोटेंशियल फॉर एक्सीलेंस' (CPE) का प्रतिष्ठित दर्जा प्रदान किया गया।
खेल, राजनीति और न्याय क्षेत्र को दीं अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय हस्तियां
बीएन कॉलेज की पहचान खेल और राजनीति के शीर्ष पुरोधाओं से जुड़ी रही है। कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. मोइनुल हक ने भारतीय ओलंपिक टीम का प्रतिनिधित्व किया था, जिनकी स्मृति में पटना का मोइनुल हक स्टेडियम निर्मित है। देश के प्रथम अटॉर्नी जनरल लाल नारायण शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री व त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मिहिर कुमार झा इस संस्थान के पूर्व छात्र रहे हैं। वहीं, 1970 में भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान रहे अर्जुन पुरस्कार विजेता सी. प्रसाद और भारतीय गोल्फ टीम के खिलाड़ी अमन राज ने भी यहीं से शिक्षा प्राप्त की। बिहार सरकार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी यहाँ के विद्यार्थी रहे हैं।
पद्म पुरस्कारों और साहित्य अकादमी सम्मानों से अलंकृत विभूतियों का केंद्र
इस महाविद्यालय से जुड़े शिक्षकों और छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पद्म श्री से सम्मानित डॉ. मोइनुल हक (1971), डॉ. कलीम अजीज (1989), डॉ. शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव (2003), डॉ. शरफे आलम (2012) और सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक व पद्म भूषण विजेता डॉ. बिंदेश्वर पाठक (1984) इस कॉलेज की साख रहे हैं। साहित्य के क्षेत्र में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रो. अरुण कमल व गनेंद्र पति भी इसी कॉलेज की देन हैं।
महान कालजयी साहित्यकारों और विद्वानों की कार्यस्थली रहा बीएन कॉलेज
कॉलेज का शैक्षणिक वातावरण हमेशा से उच्चस्तरीय अध्ययन-अध्यापन का गवाह रहा है। पचास से अधिक पुस्तकों के लेखक व रामचरितमानस के अनुवादक डॉ. आर.सी. प्रसाद, होमर के 'इलियड' व 'ओडिसी' का हिंदी अनुवाद करने वाले डॉ. आर.सी.पी. सिन्हा, प्रसिद्ध पात्र 'लोहा सिंह' के रचयिता नाटककार डॉ. रामेश्वर सिंह कश्यप तथा उर्दू साहित्य के मूर्धन्य विद्वान डॉ. अब्दुल मोगनी जैसे दिग्गजों ने यहाँ अध्यापन कर छात्रों का मार्गदर्शन किया है।