Shatrughan Sinha: अब 'खामोश' बोलने से पहले शत्रुघ्न सिन्हा से लेनी होगी अनुमति! हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए क्यों लग गया 'परमानेंट' रोक

Shatrughan Sinha: खामोश बोलने से पहले अब आपको शत्रुघ्न सिन्हा से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के आप अगर खामोश बोलते हैं या शत्रुघ्न सिन्हा के नाम-तस्वीर और डायलॉग का इस्तेमाल करते हैं तो आपको भारी पड़ सकता है।

खामोश पर लगी रोक - फोटो : social media

Shatrughan Sinha: 'खामोश' बोलना अब आपको भारी पड़ सकता है। आपको खामोश बोलने से पहले अभिनेता-राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति अगर आप उनकी नाम-तस्वीर और डायलॉग का इस्तेमाल करते हैं तो आपको जेल भी जाना पड़ सकता है। दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेता-राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा के मशहूर डायलॉग ‘खामोश’ के अनुचित इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि यह डायलॉग उनकी पहचान से गहराई से जुड़ा है और उनकी अनुमति के बिना इसका व्यावसायिक या ऑनलाइन उपयोग नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने 'खामोश' पर लगाई रोक 

16 फरवरी को पारित अंतरिम आदेश में न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख ने निर्देश दिया कि जिन वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर शत्रुघ्न सिन्हा के नाम, तस्वीरों या व्यक्तिगत विशेषताओं का उपयोग कर कंटेंट अपलोड किया गया है, उसे तत्काल हटाया जाए। साथ ही भविष्य में भी बिना अनुमति ऐसे किसी कंटेंट को अपलोड करने पर रोक रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को तय की गई है।

क्या है मामला?

यह याचिका एडवोकेट हिरेन कमोड के माध्यम से दायर की गई थी, जिसमें दिग्गज अभिनेता के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग की गई। याचिका में कहा गया था कि ‘खामोश’ डायलॉग सहित उनके नाम, छवि और अन्य पहचान चिह्नों का बिना अनुमति व्यावसायिक और डिजिटल इस्तेमाल किया जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शत्रुघ्न सिन्हा का संवाद बोलने का एक अलग अंदाज है और वे पर्दे पर ‘खामोश’ कहने की अपनी विशिष्ट शैली के लिए जाने जाते हैं। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यह शब्द उनके व्यक्तित्व से गहराई से जुड़ा हुआ है।

पर्सनैलिटी राइट्स पर अदालत की टिप्पणी

उच्च न्यायालय ने कहा कि पर्सनैलिटी राइट्स में व्यक्ति के नाम, आवाज, शैली, व्यक्तित्व और छवि के उपयोग का अधिकार शामिल है। अदालत ने यह भी माना कि डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाभ कमाने के उद्देश्य से ऐसे अधिकारों का शोषण बढ़ा है, खासकर प्रसिद्ध व्यक्तियों के मामले में।

AI और डिजिटल मॉर्फिंग पर चिंता

न्यायमूर्ति देशमुख ने कहा कि अभिनेता की फर्जी ऑनलाइन प्रोफाइल बनाना, उनकी तस्वीरों और वीडियो को मॉर्फ करना या एआई की मदद से डिजिटल रूप से छेड़छाड़ कर कंटेंट तैयार करना उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चेहरे को मॉर्फ कर या एआई से छेड़छाड़ कर बनाए गए फोटो-वीडियो उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं।