AEDO पेपर लीक: ब्लैकलिस्टेड कंपनी को दिया गया था टेंडर, बायोमेट्रिक हैक कर सॉल्वरों को बैठाने का खुलासा

बिहार में सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (एईडीओ) परीक्षा से पहले और दौरान मुंगेर पुलिस की ओर से सॉल्वर गैंग के 22 परीक्षार्थियों और 4 सॉल्वर को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद अब इस केस में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की एंट्री हो गई है।

AEDO पेपर लीक: ब्लैकलिस्टेड कंपनी को दिया गया था टेंडर- फोटो : news 4 nation

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा में हुई गड़बड़ी के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की एंट्री के साथ ही चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मुंगेर पुलिस द्वारा 22 परीक्षार्थियों और 4 सॉल्वरों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का जिम्मा EOU की SIT संभाल रही है। जांच में पता चला है कि परीक्षा संचालन का जिम्मा जिस निजी कंपनी 'मेर्सस साईं एडू केयर प्राइवेट लिमिटेड' को दिया गया था, वह पहले से ही कई राज्यों में ब्लैकलिस्टेड है। इसके बावजूद उसे इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा की जिम्मेदारी मिलना गंभीर मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है।


जयपुर की कंपनी और विवादों का पुराना नाता

जांच एजेंसी के अनुसार, मेर्सस साईं एडू केयर प्राइवेट लिमिटेड का मुख्यालय जयपुर के विद्युत् नगर में स्थित है। इस कंपनी का इतिहास अनियमितताओं और विवादों से भरा रहा है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में यह बात साफ हुई है कि यह कंपनी पहले भी कई राज्यों की प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के आरोपों के कारण ब्लैकलिस्ट की जा चुकी है। अब EOU इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि आखिर किन परिस्थितियों और किन अधिकारियों की सिफारिश पर BPSC ने एक दागदार छवि वाली कंपनी को टेंडर जारी किया।

बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंधमारी: फर्जी उम्मीदवारों को बैठाने की आशंका

SIT की जांच में एक और बड़ा खुलासा बायोमेट्रिक सिस्टम के साथ हुई छेड़छाड़ को लेकर हुआ है। जिस सिस्टम का उपयोग परीक्षार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए किया जाना था, उसे ही हैक या मैनिपुलेट किया गया था। कई केंद्रों पर बायोमेट्रिक डेटा और परीक्षार्थियों के वास्तविक रिकॉर्ड मेल नहीं खा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि इसी तकनीकी छेड़छाड़ के जरिए असली परीक्षार्थियों की जगह 'सॉल्वर' यानी फर्जी उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठाया गया। इस खुलासे ने परीक्षा की पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को दांव पर लगा दिया है।


9 सदस्यीय SIT करेगी टेंडर प्रक्रिया और सिंडिकेट की जांच

एडीजी नैय्यर हसनैन खान के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए 9 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। एसपी (प्रशासन) राजेश कुमार के नेतृत्व वाली यह टीम न केवल पेपर लीक के सिंडिकेट को ध्वस्त करेगी, बल्कि BPSC के भीतर हुई टेंडर प्रक्रिया की भी फाइलें खंगालेगी। जांच टीम में एक डीएसपी और पांच इंस्पेक्टरों को शामिल किया गया है, जो डिजिटल डेटा, सर्वर लॉग और सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुख्ता सबूत जुटाने में लगे हैं। इस जांच की आंच BPSC के कई बड़े अधिकारियों तक पहुँचने की संभावना है।


BPSC की कार्यप्रणाली पर सवाल, अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश

इस खुलासे के बाद बिहार लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा के दिन से ही सेंटरों पर तकनीकी खामियां और पहचान सत्यापन में देरी देखी गई थी, जिसे आयोग ने नजरअंदाज किया। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है। फिलहाल सबकी नजर SIT की फाइनल रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि क्या यह परीक्षा रद्द होगी और इस बड़े भ्रष्टाचार के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है।