जंग के बीच समंदर में थमीं बिहार के लाल की सांसें: मर्चेंट नेवी कैप्टन राकेश रंजन सिंह की मौत, भाई बोले- 'एक दिन बाद युद्ध छिड़ता तो बच जाता मेरा भाई

होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाज 'अवाना' के कैप्टन राकेश रंजन सिंह की मौत से बिहार और झारखंड में शोक की लहर है। युद्ध के बीच समुद्र में फंसे कैप्टन के परिवार ने खोया अपना आधार।

Nalanda - ईरान और इजरायल के बीच गहराते युद्ध ने एक भारतीय परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया है। 'स्टेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में फंसे मालवाहक जहाज 'अवाना' के कैप्टन राकेश रंजन सिंह (47) की मौत की खबर ने नालंदा से लेकर रांची तक सन्नाटा पसार दिया है। युद्ध जैसे हालातों में उनका जहाज पिछले कई दिनों से समुद्र के बीच फंसा हुआ था, जहाँ से वह क्रूड ऑयल लेकर भारत लौटने की तैयारी में थे।

नालंदा का लाल, रांची में बसता था संसार 

मूल रूप से बिहारशरीफ के प्रोफेसर कॉलोनी के रहने वाले राकेश रंजन सिंह का परिवार वर्तमान में रांची के अरगोड़ा स्थित वसुंधरा अपार्टमेंट में रहता है। परिवार में उनकी पत्नी रंजू कुमारी और दो बेटे हैं। बड़ा बेटा प्रवर बेंगलुरु में इंजीनियरिंग कर रहा है, जबकि छोटा बेटा ओम अभी स्कूली छात्र है। राकेश पिछले 24 वर्षों से मर्चेंट नेवी में अपनी सेवाएं दे रहे थे और अपने मिलनसार स्वभाव के कारण समाज में 'देवानंद' के नाम से भी लोकप्रिय थे।

"एक दिन बाद युद्ध शुरू होता तो भाई बच जाता" 

राकेश के बड़े भाई उमेश कुमार ने बेहद भावुक होते हुए नियति को कोसा। उन्होंने कहा, "अगर युद्ध एक दिन बाद शुरू होता, तो मेरा भाई सुरक्षित निकल आता।" परिजनों ने बताया कि 18 मार्च को हुई आखिरी बातचीत में राकेश ने वहां के नाजुक हालातों पर चिंता जताई थी। उन्होंने बताया था कि समुद्र में कई जहाज लंगर डालकर खड़े हैं और आगे का रास्ता पूरी तरह अनिश्चित है। यही चिंता उनकी आखिरी बातचीत साबित हुई।

गांव में होगा अंतिम संस्कार, उत्सव हुए रद्द

 कैप्टन राकेश रंजन के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया जारी है। अंतिम दर्शन के लिए उनके शव को पैतृक गांव, नालंदा के सरमेरा प्रखंड स्थित गोवा चक ले जाया जाएगा। इस दुखद समाचार के बाद रांची के वसुंधरा अपार्टमेंट में होने वाले दशहरा समारोह को रद्द कर दिया गया है। संयोगवश उनकी बहन, जो दुबई में रहती हैं, इन दिनों भारत में ही हैं, जिससे उन्हें अपने भाई के अंतिम दर्शन का मौका मिल सकेगा।

एक होनहार व्यक्तित्व का अंत 

राकेश रंजन सिंह न केवल एक कुशल कैप्टन थे, बल्कि अपने युवा दिनों में एक अच्छे क्रिकेटर और सामाजिक रूप से बेहद सक्रिय व्यक्ति भी थे। उनके निधन की खबर मिलते ही परिचितों और रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है। हर कोई उस युद्ध और समय को जिम्मेदार ठहरा रहा है जिसने एक जांबाज अधिकारी और एक जिम्मेदार पिता को उनसे हमेशा के लिए छीन लिया।