नवगछिया में खींचने वाली है नई 'प्रशासनिक लकीर': 1.50 लाख की आबादी और 12 पंचायतों का बदलेगा पता? सचिवालय से भागलपुर DM को पहुंचा खास फरमान!

भागलपुर के ढोलबज्जा को स्वतंत्र प्रखंड बनाने की मांग पर बिहार सरकार ने प्रशासनिक कवायद तेज कर दी है। ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में जिलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

नवगछिया में खींचने वाली है नई 'प्रशासनिक लकीर': 1.50 लाख की

Bhagalpur - भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल स्थित ढोलबज्जा को स्वतंत्र प्रखंड का दर्जा दिलाने की वर्षों पुरानी मांग अब धरातल पर उतरती दिख रही है। जदयू अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव प्रशांत भवेश कुमार कन्हैया द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर बिहार सरकार ने औपचारिक कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को ज्ञापन सौंपकर इस क्षेत्र की प्रशासनिक जटिलताओं और स्थानीय जनता की समस्याओं से अवगत कराया था।

प्रस्तावित प्रखंड का स्वरूप और आबादी 

सौंपे गए प्रस्ताव के अनुसार, नए प्रखंड में ढोलबज्जा सहित खैरपुर कदवा, कदवा दियारा, पुनामा प्रतापनगर, लोकमानपुर और अरजपुर जैसी करीब 12 पंचायतों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। जदयू नेता के मुताबिक, प्रस्तावित प्रखंड की अनुमानित जनसंख्या 1.50 लाख से अधिक और क्षेत्रफल लगभग 140–150 वर्ग किलोमीटर होगा, जो सरकार के निर्धारित मानकों के पूर्णतः अनुरूप है।

मंत्रियों का कड़ा निर्देश और विभागीय पत्र 

पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार को आवश्यक कार्रवाई हेतु पत्र प्रेषित किया था। इसके बाद ग्रामीण विकास मंत्री ने बिहार सरकार के प्रधान सचिव को मामले का संज्ञान लेते हुए त्वरित निर्देश जारी किए। इस राजनीतिक सक्रियता के बाद अब गेंद प्रशासनिक अधिकारियों के पाले में है।

जिलाधिकारी भागलपुर को भेजी गई फाइल 

प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए बिहार सरकार के अवर सचिव विभाकर कुमार ने भागलपुर जिलाधिकारी (DM) को आधिकारिक पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि प्रशांत भवेश द्वारा दिए गए आवेदन पर समुचित कार्रवाई की जाए और विषय से संबंधित एक विस्तृत प्रतिवेदन (Detailed Report) तैयार कर शीघ्र विभाग को उपलब्ध कराया जाए।

उपेक्षा के अंत और विकास की नई आस 

कोसी पार के इस उपेक्षित क्षेत्र के लोगों के लिए ढोलबज्जा का प्रखंड बनना केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि विकास की नई किरण है। वर्तमान में यह क्षेत्र अलग-अलग प्रखंडों और जिलों में बंटा होने के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को काफी संघर्ष करना पड़ता है। इस प्रशासनिक पहल से स्थानीय लोगों में भारी उत्साह है और उन्हें उम्मीद है कि उनकी यह लंबी मांग अब जल्द पूरी होगी।