Bihar Politics: NDA में रहकर बगावती तेवर! चिराग पासवान ने क्यों खोला अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा? क्या 2027 से पहले नई सियासी जमीन तलाश रहे?पढ़िए
Bihar Politics: बिहार की सियासत में इन दिनों केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान के बदले तेवर चर्चा का सबब बने हुए हैं। ...
Bihar Politics: बिहार की सियासत में इन दिनों केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान के बदले तेवर चर्चा का सबब बने हुए हैं। एनडीए सरकार का हिस्सा होने के बावजूद चिराग लगातार बिहार की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के सवाल पर अपनी ही सरकार को घेर रहे हैं। हालिया बयान में उन्होंने यहां तक कहा कि अगर सरकार लोगों में सुरक्षा का एहसास पैदा नहीं कर पा रही है तो वह ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं कर सकते। एक बयान में उन्होंने सरकार का हिस्सा होने के बावजूद ऐसी घटनाओं पर शर्मिंदगी महसूस करने की बात कही। इन बयानों ने सत्ता के गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि चिराग की पार्टी बिहार की मौजूदा एनडीए सरकार में साझेदार है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एलजेपी (रामविलास) के पास केंद्र में पांच सांसद और बिहार विधानसभा में 19 विधायक हैं। पार्टी के भीतर यह तर्क भी सामने आया है कि गठबंधन में रहते हुए अपने समर्थकों और मतदाताओं से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहना जरूरी है।
सरकार पर निशाना, लेकिन केंद्र पर अलग रुख
चिराग का राजनीतिक रुख हर मुद्दे पर एक जैसा नहीं रहा है। चुनाव आयोग से जुड़े विवाद में उन्होंने आयोग से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है, जबकि यूसीसी को लेकर उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट सार्वजनिक होने के बाद उनकी पार्टी अपना विस्तृत रुख स्पष्ट करेगी। यानी अलग-अलग राष्ट्रीय मुद्दों पर उनका रुख मुद्दे के मुताबिक सामने आया है।बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर उनके तेवर हालांकि ज्यादा तल्ख दिखाई दे रहे हैं। जमुई और समस्तीपुर की घटनाओं के बाद चिराग ने स्थानीय प्रशासन को सख्ती बरतने की जरूरत बताई और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
सत्ता पक्ष का पलटवार
चिराग के बयानों के बाद एनडीए के भीतर से भी जवाब आने लगे हैं। सत्ता पक्ष के नेताओं ने उन्हें मीडिया में बयान देने के बजाय सरकार के साथ सीधे संवाद करने और बिहार में वक्त गुजारकर जमीनी हालात देखने की नसीहत दी है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी चिराग के बयान पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का बचाव किया।यानी एक ही गठबंधन के भीतर कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बयानबाजी ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। हालांकि इन बयानों को गठबंधन टूटने या चिराग के अलग रास्ते पर जाने का निश्चित संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी।
क्या चिराग की नजर यूपी पर है?
चिराग पासवान की राजनीति का दायरा बिहार से बाहर भी बढ़ाने की कोशिश जारी है। उनकी पार्टी ने उत्तर प्रदेश और पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। खासकर उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन विस्तार पर काम किया जा रहा है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पार्टी पूर्वांचल और आसपास के इलाकों में संगठन मजबूत करने और चुनाव में पर्याप्त सीटों पर उतरने की तैयारी कर रही है।अगस्त में एलजेपी (रामविलास) ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान भी किया था। पार्टी ने उत्तर प्रदेश को अलग-अलग जोन में बांटकर संगठनात्मक जिम्मेदारियां तय की हैं, जो राज्य में उसकी तैयारियों का संकेत देता है।
मंत्रालय से लेकर गठबंधन की राजनीति तक
चिराग पासवान 2024 में केंद्र की मोदी सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री बने थे। उन्होंने 11 जून 2024 को मंत्रालय का कार्यभार संभाला था। वर्तमान में भी सरकारी रिकॉर्ड में वह इसी मंत्रालय के मंत्री हैं।खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के लिए 2026-27 में 4,064 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान है। मंत्रालय को लेकर राजनीतिक अटकलें अपनी जगह हैं, लेकिन किसी संभावित कैबिनेट विस्तार या पोर्टफोलियो बदलाव को लेकर अंतिम फैसला तभी माना जा सकता है जब सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा हो।
विरासत की चर्चा
चिराग के मौजूदा तेवरों को लेकर राजनीतिक विश्लेषण में उनके पिता रामविलास पासवान की पुरानी गठबंधन राजनीति का भी जिक्र हो रहा है। रामविलास पासवान अलग-अलग दौर में सत्ता में रहने वाले गठबंधनों का हिस्सा रहे और इसी वजह से उन्हें राजनीतिक ‘मौसम वैज्ञानिक’ कहे जाने की चर्चा लंबे समय तक होती रही।
हालांकि चिराग के मौजूदा रुख को सीधे तौर पर उसी रणनीति का विस्तार मानना एक राजनीतिक व्याख्या है, कोई स्थापित तथ्य नहीं। इतना जरूर है कि चिराग अपनी पार्टी की अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखने पर जोर देते रहे हैं। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा था, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में एलजेपी (रामविलास) ने एनडीए के साथ रहते हुए अपनी लड़ी गई सभी पांच सीटें जीती थीं।फिलहाल तस्वीर यही है कि चिराग पासवान एनडीए का हिस्सा रहते हुए बिहार सरकार की कार्यशैली पर मुखर सवाल उठा रहे हैं और साथ ही अपनी पार्टी का विस्तार बिहार से बाहर करने की तैयारी में जुटे हैं। आगे उनका रुख गठबंधन की राजनीति, बिहार में सरकार के साथ रिश्तों और यूपी की चुनावी रणनीति तीनों मोर्चों पर अहम माना जाएगा।
-हीरेश कुमार