पटना में देश के पहले पीड़ित अधिकार केंद्र का उद्घाटन, CJI सूर्यकांत ने किया शुभारम्भ

यह केंद्र बिहार राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण की पायलट परियोजना है, जिसे कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत स्थापित किया गया है।

CJI Surya Kant - फोटो : news4nation

CJI :  पटना स्थित बिहार राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (BALSA) परिसर में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को देश के पहले पीड़ित अधिकार केंद्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘ट्रांसजेंडर हेल्पलाइन’ की भी शुरुआत की। केंद्र का उद्देश्य अपराध के पीड़ितों और उनके परिवारों को न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कानूनी सहायता के साथ चिकित्सा, पुनर्वास, क्षतिपूर्ति और अन्य जरूरी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है।


उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि पीड़ित अधिकार केंद्र का महत्व काफी बड़ा है। न्याय तभी सार्थक होगा, जब वह उन लोगों तक पहुंच सके, जिन्हें उसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र को ऐसे पीड़ित नागरिकों तक पहुंचना होगा, जो संसाधनों, जानकारी या अन्य कारणों से स्वयं न्यायिक प्रक्रिया तक नहीं पहुंच सकते।


उन्होंने कहा कि आम पीड़ितों के अलावा महिला, बच्चे, ट्रांसजेंडर और वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को भी प्राथमिकता देनी होगी। जिन लोगों को न्यायिक व्यवस्था की जानकारी नहीं है, उनके पास स्वयं न्याय तक पहुंचने के पर्याप्त साधन नहीं हैं, वहां न्याय व्यवस्था का खुद पहुंचना संवैधानिक दायित्व है। केंद्र के माध्यम से कानूनी सहायता, सलाह, चिकित्सा सहायता, पुनर्वास और मुआवजा समेत विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।


एक ही जगह मिलेगी कई सेवाएं

यह केंद्र बिहार राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण की पायलट परियोजना है, जिसे कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत स्थापित किया गया है। अब तक पीड़ितों को पुलिस स्टेशन, अस्पताल, अदालत और विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। विभिन्न संस्थाओं में बंटी सहायता व्यवस्था को एकीकृत करने के लिए केंद्र में एकल प्रवेश द्वार और एकल रिकॉर्ड की व्यवस्था होगी। इससे पीड़ित को बार-बार अपनी आपबीती बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


केंद्र में मामलों के लिए आंतरिक समय-सीमा निर्धारित होगी और राहत उपलब्ध कराने तथा आवश्यक सत्यापन के बाद ही मामले को बंद किया जाएगा। इसके लिए किसी नए कानून या नए वैधानिक निकाय का गठन नहीं किया गया है, बल्कि प्राधिकरण के मौजूदा परिसर और संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, निरंतरता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।


नौ मल्टी-यूटिलिटी वाहन रवाना

BALSA के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुधीर सिंह ने कहा कि न्याय तभी सफल और सार्थक होगा, जब वह जरूरतमंद पीड़ितों तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि नौ मल्टी-यूटिलिटी वाहनों को राज्य के विभिन्न हिस्सों के लिए रवाना किया गया है। ये वाहन कानूनी सहायता और न्यायिक अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे। CJI सूर्यकांत ने वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और प्राधिकरण के आधिकारिक प्रकाशन का विमोचन किया।


पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव ने भी केंद्र की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। परियोजना की परिकल्पना और कार्यान्वयन उनके तथा न्यायमूर्ति सुधीर सिंह के मार्गदर्शन में किया गया है। पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजीत कुमार इसके पहले अध्यक्ष हैं।


केंद्र ‘स्थितिजन्य पीड़ितों’ को भी एक विशिष्ट वर्ग के रूप में दर्ज करेगा। ऐसे मामलों में लंबे समय तक विचाराधीन कैदी रहने वाले व्यक्ति के परिवार की आय बंद हो जाना या उसके जेल से लौटने के बाद आजीविका और सामाजिक जीवन प्रभावित होना शामिल है। बिहार में 31 दिसंबर 2023 तक 53,076 बंदी थे, जिनमें 46 हजार से अधिक विचाराधीन कैदी थे। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल, पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश, विधि सचिव बलराम दुबे, अधिवक्तागण और अधिकारी मौजूद रहे। BALSA के सदस्य सचिव पुरुषोत्तम मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया।